बल्लो में उमड़ा आस्था का महासागर, 22 किमी लंबी भव्य यात्रा के साथ माता लक्ष्मी मूर्ति स्थापना का ऐतिहासिक आयोजन
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।सिसवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बल्लो में सोमवार को सनातन आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना के अवसर पर निकाली गई भव्य और ऐतिहासिक यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त करने वाला भी सिद्ध हुआ।
भव्य यात्रा की शुरुआत ग्राम पंचायत बल्लो से हुई, जो महराजगंज जनपद में प्रवेश करते हुए नरायनपुर गांव से होकर लगभग 22 किलोमीटर की दूरी तय कर पुनः बल्लो स्थित मंदिर परिसर के निर्धारित स्थल तक पहुंची। यात्रा के दौरान ‘जय माता लक्ष्मी’ के गगनभेदी जयकारे, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्ति गीतों ने पूरे मार्ग को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था।
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यात्रा में महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाएं सिर पर कलश धारण किए, युवाओं के हाथों में ध्वज-पताकाएं और बच्चों के चेहरों पर उत्साह की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया, जिससे माहौल और भी भावुक एवं भक्तिमय बन गया।
सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पुरैना, पनियरा, महराजगंज, भिटौली चौकी, शिकारपुर और यातायात पुलिस सहित विभिन्न थानों की पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस की सतर्कता के चलते यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और सुरक्षित रूप से संपन्न होती रही।
आयोजकों और ग्रामीणों का कहना है कि माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और सनातन मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी प्रतीक बना।
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इस अवसर पर यजमान के रूप में तारकेश्वर वर्मा, दिनेश वर्मा, रुपेश वर्मा, बोधगया, संतोष सहित अन्य श्रद्धालु अपनी-अपनी धर्मपत्नी के साथ विधि-विधानपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बने। ग्राम प्रधान सतीश द्वारा आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। यह ऐतिहासिक आयोजन आने वाले समय में भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और स्मृति का केंद्र बना रहेगा।
