Monday, February 2, 2026
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विद्यार्थियों के लिए प्रेरक जीवन और विरासत

कमाल अमरोही (1918–1993)
कमाल अमरोही भारतीय सिनेमा के महान निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक थे। पाक़ीज़ा, मुग़ल-ए-आज़म जैसी कालजयी फ़िल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। 11 फ़रवरी 1993 को मुंबई में उनका निधन हुआ। उनके सिनेमा में साहित्यिक संवाद, भव्य सेट और गहरी भावनाएँ प्रमुख रहीं। भारतीय फ़िल्म इतिहास में उनका योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

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एम. जी. रामचन्द्रन – एमजीआर (1917–1987)
एमजीआर तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे। 24 दिसम्बर 1987 को चेन्नई में उनका निधन हुआ। उन्होंने राजनीति में नैतिकता, जनकल्याण और समाज सुधार को केंद्र में रखा। उनकी लोकप्रियता आज भी जनमानस में जीवित है।
रांगेय राघव (1923–1962)
रांगेय राघव हिंदी साहित्य के प्रगतिशील लेखक थे। 5 सितम्बर 1962 को अल्पायु में उनका निधन हुआ। कब तक पुकारूँ, मुर्दों का टीला जैसे उपन्यास सामाजिक यथार्थ को उजागर करते हैं। उन्होंने साहित्य को जनसंघर्ष से जोड़ा।
एल. वी. प्रसाद (1908–1994)
एल. वी. प्रसाद प्रसिद्ध फ़िल्मकार और प्रसाद स्टूडियोज़ के संस्थापक थे। 22 जून 1994 को उनका निधन हुआ। दक्षिण भारतीय सिनेमा को तकनीकी और व्यावसायिक रूप से नई ऊँचाइयाँ देने में उनकी बड़ी भूमिका रही।
नाज़िम हिकमत (1920–1963)
तुर्की के क्रांतिकारी कवि नाज़िम हिकमत का निधन 3 जून 1963 को मॉस्को में हुआ। उनकी कविताएँ मानवता, स्वतंत्रता और प्रेम की प्रतीक हैं। विश्व साहित्य में उनका स्थान अत्यंत सम्मानित है।

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शकुंतला परांजपे (1906–1959)
भारतीय लेखिका, अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता शकुंतला परांजपे का निधन 3 मई 1959 को हुआ। उन्होंने महिला अधिकारों और सामाजिक चेतना पर प्रभावशाली कार्य किया।
कोंस्तेंतिन स्तानिस्लावस्की (1863–1938)
महान रूसी रंगकर्मी स्तानिस्लावस्की का निधन 7 अगस्त 1938 को हुआ। उनकी अभिनय पद्धति ने आधुनिक रंगमंच को यथार्थवाद की नई दिशा दी, जो आज भी विश्वभर में पढ़ाई जाती है।

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