लाल किला कार विस्फोट केस में चली कार्यवाही
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार विस्फोट मामले की जांच में मंगलवार को बड़ा मोड़ तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आतंकी साजिश से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच के लिए दिल्ली, फरीदाबाद और आसपास के 25 ठिकानों पर तड़के छापेमारी शुरू की। ईडी की इस कार्रवाई में फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय का ओखला कार्यालय भी शामिल है, जो अब जांच के दायरे में आ गया है।
यह कदम उस समय उठाया गया है जब विस्फोट मामले में पहले ही कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमले में 15 लोगों की मौत और 30 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मामले को अत्यंत गंभीर माना है। आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन-नबी, जो कश्मीर का निवासी था और अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ा था, अब जांच के केंद्र में है।
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विश्वविद्यालय पर जालसाजी के आरोप भी बढ़े
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच अल-फलाह विश्वविद्यालय के संस्थापक जवाद से पूछताछ करेगी। विश्वविद्यालय पर दो एफआईआर दर्ज हैं—एक में आरोप है कि विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर यूजीसी 12बी स्टेटस का झूठा दावा किया, जबकि दूसरी एफआईआर 2018 में एनएएसी मान्यता समाप्त होने के बावजूद प्रवेश जारी रखने से संबंधित है।
एनआईए की गिरफ्तारी से बड़ा सुराग
सोमवार को एनआईए ने इस केस में बड़ी सफलता हासिल करते हुए जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार, उसने ड्रोन में बदलाव कर आतंकी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता दी और रॉकेट बनाने की कोशिश की, जिससे विस्फोट की योजना को अंजाम देने में मदद मिली।
सुरक्षा एजेंसियों ने पता लगाया है कि डॉ. उमर ने तीन महीने पहले एक एन्क्रिप्टेड सिग्नल ग्रुप बनाया था, जिसमें अदील, मुज़म्मिल, मुज़फ्फर और इरफान शामिल थे। इस ग्रुप को आतंकी नेटवर्क के भीतर समन्वय के लिए इस्तेमाल किया गया था। मामले के एक संदिग्ध डॉ. शाहीन की कार से क्रिनकोव राइफल और पिस्तौल मिलने के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ी है।
ईडी की वर्तमान छापेमारी से यह स्पष्ट है कि जांच अब आतंकी नेटवर्क की फंडिंग और संस्थागत समर्थन को उजागर करने की दिशा में बढ़ रही है।
