देवरिया में SIR के दौरान 4.14 लाख वोट कटे, 2027 विधानसभा चुनाव में किसे होगा फायदा?

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद में मतदाता सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में वोट कटने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में जनपद की सातों विधानसभा सीटों से कुल 4,14,799 वोट कम हो गए हैं। औसतन प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 59,257 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

यह भारी कटौती आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव में किस दल के लिए फायदेमंद साबित होगी और किसके लिए नुकसानदेह, इस पर सियासी बहस तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल इसे अपने-अपने पक्ष में मुफीद बताने में जुटे हुए हैं, लेकिन वास्तविक असर तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ होगा।

2022 के मुकाबले कई गुना अधिक वोट कटे

गौर करने वाली बात यह है कि लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान कटे वोटों की संख्या, 2022 विधानसभा चुनाव में जीत-हार के अंतर से दो से तीन गुना अधिक है। ऐसे में मतदाताओं की इस कमी का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

विधानसभा वार वोट कटौती और 2022 का अंतर

बरहज विधानसभा:
2022 में जीत-हार का अंतर 16,861 वोट था, जबकि SIR में 53,908 वोट कटे।

देवरिया सदर:
जीत-हार का अंतर 40,655 वोट, लेकिन 88,434 वोट कम हुए।

पथरदेवा:
अंतर 28,681 वोट, SIR में 49,623 वोट घटे।

रुद्रपुर:
अंतर 41,936 वोट, SIR में 45,389 वोट कटे।

सलेमपुर:
अंतर 16,608 वोट, SIR में रिकॉर्ड 70,966 वोट कम।

भाटपार रानी:
अंतर 18,082 वोट, SIR में 49,208 वोट घटे।

रामपुर कारखाना:
अंतर 16,608 वोट, SIR में 49,208 वोट कम।

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CM योगी के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

इस पूरे मुद्दे को और गंभीर बनाता है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान, जिसमें उन्होंने कहा था कि SIR में कटे 85–90 प्रतिशत वोट उनके समर्थकों के हो सकते हैं। यदि इस दावे को आधार माना जाए, तो देवरिया जनपद में कटे 4.14 लाख वोट 2027 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

2027 में बदलेगा चुनावी गणित?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मतदाता सूची में हुई यह कटौती संतुलित नहीं हुई, तो कई सीटों पर चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। खासकर वे सीटें जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था, वहां यह वोट कटौती परिणाम को पलट सकती है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि SIR में घटे वोट किस दल के लिए संजीवनी बनते हैं और किसके लिए सियासी संकट, इसका जवाब 2027 के विधानसभा चुनाव नतीजे ही देंगे।

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Karan Pandey

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