16 समझौते, रक्षा-तकनीक में बढ़त: इजरायल दौरे से मजबूत भारत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पीएम मोदी इजरायल दौरा: 24 घंटे में बड़े फैसले, भारत-इजरायल संबंध नई ऊंचाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया पीएम मोदी इजरायल दौरा भारत-इजरायल संबंधों के इतिहास में एक अहम पड़ाव बनकर उभरा है। करीब 24 घंटे से कुछ अधिक समय की इस यात्रा को विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने “मील का पत्थर” करार दिया। यह दौरा प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर हुआ और लगभग नौ वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की दूसरी इजरायल यात्रा रही।
इस यात्रा ने स्पष्ट कर दिया कि भारत-इजरायल संबंध अब पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर रणनीतिक, तकनीकी और वैश्विक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं।
नेसेट में संबोधन और ऐतिहासिक ‘नेसेट मेडल’ सम्मान।
इस दौरे का सबसे चर्चित और प्रतीकात्मक क्षण था प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल की संसद Knesset में संबोधन।
प्रधानमंत्री को भारत-इजरायल संबंधों को नई मजबूती देने के लिए ‘नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान को पाने वाले दुनिया के पहले नेता बने। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारत-इजरायल संबंधों की गहराई और आपसी विश्वास का प्रतीक है।

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अपने संबोधन में पीएम मोदी ने लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार, सुरक्षा सहयोग और साझा भविष्य की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल दोनों ही देश आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ हैं और शांति व प्रगति के लिए मिलकर काम करेंगे।
मोदी-नेतन्याहू बैठक: रणनीतिक साझेदारी को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की।
इस बैठक में निर्णय लिया गया कि भारत-इजरायल संबंधों को ‘शांति, इनोवेशन और खुशहाली के लिए भारत-इजरायल स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक उन्नत किया जाएगा।
दोनों नेताओं ने रक्षा, तकनीक, कृषि और साइबर सुरक्षा को भविष्य के सहयोग का मुख्य आधार बताया।

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16 महत्वपूर्ण समझौते: तकनीक से रक्षा तक व्यापक सहयोग
पीएम मोदी इजरायल दौरा के दौरान कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी
विज्ञान, टेक्नोलॉजी और स्पेस रिसर्च
कृषि नवाचार और जल प्रबंधन
रक्षा उत्पादन और संयुक्त विकास
व्यापार और निवेश विस्तार
भारत-इजरायल संबंधों की मजबूती के लिए साइंस एंड टेक्नोलॉजी जॉइंट कमीशन को अब मंत्रालय स्तर तक उन्नत करने का फैसला भी लिया गया है। इससे संयुक्त परियोजनाओं को तेजी मिलेगी।
रक्षा क्षेत्र में ड्रोन टेक्नोलॉजी, मिसाइल सिस्टम और सीमा सुरक्षा तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने की सहमति बनी है।
याद वाशेम में श्रद्धांजलि: इतिहास के प्रति सम्मान
यरुशलम में प्रधानमंत्री ने विश्व होलोकॉस्ट स्मृति केंद्र Yad Vashem का दौरा कर पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह दौरा भारत-इजरायल संबंधों में मानवीय संवेदनशीलता और ऐतिहासिक समझ का प्रतीक रहा।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने इजरायल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से मुलाकात की। ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के अंतर्गत राष्ट्रपति भवन परिसर में ओक का पौधा लगाया गया, जो पर्यावरण और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बना।
भारतीय यहूदी समुदाय और सांस्कृतिक संवाद
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदी समुदाय और इंडोलॉजिस्ट से मुलाकात की।
उन्होंने लोकप्रिय इजरायली टीवी सीरीज Fauda के कलाकारों से भी संवाद किया। यह सांस्कृतिक संपर्क दोनों देशों के बीच जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-इजरायल संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज, संस्कृति और शिक्षा तक विस्तार पा चुके हैं।

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पश्चिम एशिया में भारत की सक्रिय कूटनीति
पीएम मोदी इजरायल दौरा व्यापक पश्चिम एशिया रणनीति का हिस्सा है। पिछले एक वर्ष में प्रधानमंत्री ने कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और ओमान जैसे देशों का दौरा कर भारत की क्षेत्रीय उपस्थिति को सुदृढ़ किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-इजरायल संबंधों की मजबूती पश्चिम एशिया में संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति का संकेत है।
क्यों अहम है यह दौरा?
रक्षा सहयोग में नई तेजी
हाई-टेक और स्टार्टअप साझेदारी का विस्तार
जल संकट और कृषि समाधान में संयुक्त नवाचार
आतंकवाद विरोधी सहयोग की मजबूती
वैश्विक मंचों पर साझा रणनीतिक समर्थन
भारत-इजरायल संबंध अब केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि सह-विकास और सह-उत्पादन के मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं।

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विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा भारत को पश्चिम एशिया में एक संतुलित और प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
पीएम मोदी इजरायल दौरा ने दिखाया कि भारत वैश्विक तकनीकी और सुरक्षा साझेदारियों में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है।
निष्कर्ष: भविष्य की दिशा
यह स्पष्ट है कि पीएम मोदी इजरायल दौरा केवल प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी, बल्कि ठोस नीतिगत परिणामों से भरपूर रही।
भारत-इजरायल संबंध अब रक्षा और कृषि से आगे बढ़कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, स्पेस टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम तक फैल चुके हैं।
नेसेट मेडल सम्मान, 16 समझौते और स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा — ये सभी संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में भारत-इजरायल संबंध और मजबूत होंगे।

Editor CP pandey

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