लापरवाही की कीमत: सड़क पर बहा पीने का अनमोल पानी, हजारों लीटर की बर्बादी से उठे सवाल
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।एक तरफ प्रशासन जल संरक्षण को लेकर आम जनता से लगातार जागरूकता की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी विकास कार्यों में बरती जा रही गंभीर लापरवाही से पीने योग्य पानी सड़कों पर बहता नजर आ रहा है। देवरिया शहर में विद्युत पोल और तारों के नवीनीकरण कार्य के दौरान ठेके पर काम कर रही एजेंसी की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिससे हजारों लीटर स्वच्छ पेयजल बर्बाद हो गया।
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जानकारी के अनुसार, भीखमपुर रोड स्थित केनरा बैंक के पास चल रहे खुदाई कार्य के दौरान कर्मचारियों ने बिना समुचित तकनीकी सावधानी के गड्ढा खोद दिया। इसी दौरान जलकल विभाग की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। पाइप फटते ही तेज दबाव के साथ पानी सड़क पर फैल गया, जिससे कुछ ही समय में आसपास के इलाके में जलभराव की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पानी काफी देर तक यूं ही बहता रहा, लेकिन न तो संबंधित कार्यदायी एजेंसी ने तत्काल सुधार की कोशिश की और न ही जलकल विभाग की ओर से त्वरित कार्रवाई देखने को मिली। इस लापरवाही के चलते हजारों लीटर पीने योग्य पानी बर्बाद हो गया, जबकि शहर के कई मोहल्लों में लोग नियमित जलापूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं।
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स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन एक ओर जल संरक्षण को लेकर नियम-कानून और अपील करता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी ठेकेदारों की लापरवाही पर आंख मूंद लेता है। लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन दोषी एजेंसियों पर न तो जुर्माना लगाया जाता है और न ही कोई सख्त कार्रवाई होती है।
नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत कर दी जाती और जिम्मेदार एजेंसी पर आर्थिक दंड लगाया जाता, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकती थी। जल संकट के इस दौर में पीने के पानी की इस तरह की बर्बादी न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि जल संरक्षण अभियान की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती है।
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यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जल संरक्षण सिर्फ आम जनता की जिम्मेदारी है या फिर प्रशासन और कार्यदायी संस्थाओं की भी समान जवाबदेही तय होनी चाहिए। जब तक लापरवाही पर सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक अनमोल जल यूं ही सड़कों पर बहता रहेगा।
