तिथि: शुक्ल पक्ष पंचमी — दोपहर 12:04 बजे तक, उसके बाद षष्ठी
वार: सोमवार
नक्षत्र: अनूराधा — रात्रि 1:08 AM तक
चंद्र राशि: वृश्चिक (Scorpio)
करण: बालव — दोपहर 12:04 तक, तत्पश्चात कौलव
योग: प्रीति
सूर्योदय / सूर्यास्त: 5:48 AM / 5:49 PM (वाराणसी समयानुसार)
चंद्र उदय: 10:28 AM
दोष काल:राहुकाल: 8:48 AM – 10:18 AM
गुलिक काल: 5:48 AM – 7:18 AM
यमघंट: 1:19 PM – 2:49 PM
शुभ मुहूर्त: 11:24 AM – 12:12 PM
🔱 पूजा एवं विशेषता
यह दिन स्कंद षष्ठी का माना जाता है। भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की पूजा विशेष फलदायी रहेगी।
सोमवार होने से शिव पूजन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
नवरात्रि के चलते देवी दुर्गा की नियमित पूजा, दुर्गा स्तुति, धूप-दीप-अक्षत अर्पण करना श्रेष्ठ होगा।
राहुकाल और यमघंट में कोई शुभ कार्य न करें।
30 सितंबर 2025 – मंगलवार का पंचांग
तिथि: शुक्ल पक्ष षष्ठी — दोपहर 2:28 बजे तक, तत्पश्चात सप्तमी
वार: मंगलवार
नक्षत्र: ज्येष्ठा — रात्रि 3:55 AM तक
चंद्र राशि: वृश्चिक (Scorpio)
करण: तैतिल — दोपहर तक
योग: आयुष्मान
सूर्योदय / सूर्यास्त: 5:49 AM / 5:48 PM
चंद्र उदय: 11:24 AM
दोष काल: राहुकाल: 3:18 PM – 4:48 PM
गुलिक काल: 12:18 PM – 1:48 PM
यमघंट: 9:18 AM – 10:48 AM
🔱 पूजा एवं विशेषता
यह दिन नवरात्रि की षष्ठी के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन देवी दुर्गा की काल प्रारंभ पूजा, बिल्व निमंत्रण और अकाल बोधन का विशेष महत्व है।
भगवान शिव को बिल्व पत्र अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
सुबह और दोपहर मध्य का समय पूजा-अर्चना हेतु श्रेष्ठ रहेगा।
राहुकाल एवं दोषकालों से बचते हुए ही पूजन या मांगलिक कार्य करें।
✨ समग्र विशेष मार्गदर्शन (27 से 30 सितंबर का संदर्भ)
27 व 29 सितंबर: चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहते हुए अनूराधा नक्षत्र में — यह काल स्कंद पूजा व शिव-शनि उपासना हेतु अनुकूल।
28 व 30 सितंबर: चंद्रमा वृश्चिक राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र में — नवरात्रि षष्ठी के कारण देवी दुर्गा की आराधना, अकाल बोधन, बिल्व निमंत्रण का महत्व।
सभी दिनों में राहुकाल, यमघंट, गुलिक काल में शुभ कार्य न करें।
📍 नोट: यह पंचांग सामान्य पंचांग व समयानुसार तैयार है। स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त और तिथि-नक्षत्र में कुछ अंतर संभव है। अतः अंतिम निर्णय हेतु किसी योग्य पंडित या ज्ञानी से परामर्श अवश्य लें।
