प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के सामने झुकेंगे? राहुल गांधी का दावा

ट्रंप के टैरिफ लागू होने से पहले व्यापार समझौते पर गरमाई सियासत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क ब्यूरो), अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित पारस्परिक टैरिफ (Mutual Tariffs) के लागू होने में अब सिर्फ तीन दिन शेष रह गए हैं, ऐसे में भारत-अमेरिका के संभावित व्यापार समझौते को लेकर देश में सियासत तेज़ हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक तीखा बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और दावा किया कि “मोदी जी अमेरिका के दबाव में आकर समय सीमा से पहले समझौते पर हस्ताक्षर कर देंगे।”

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के सामने हमेशा झुकते आए हैं। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ की धमकी के बाद मोदी सरकार घुटनों के बल आ जाएगी। भारत के किसानों, उद्योगपतियों और श्रमिकों के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए।”

गांधी के इस बयान के तुरंत बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने प्रतिक्रिया दी और साफ़ किया कि भारत तभी कोई व्यापार समझौता करेगा जब देश के हितों की पूरी तरह से रक्षा होगी।

गोयल का जवाब – भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा
पीयूष गोयल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “भारत एक आत्मनिर्भर राष्ट्र है और हमारी सरकार अमेरिकी दबाव में कोई फैसला नहीं लेती। अगर व्यापार समझौता होता है तो वह भारत के लिए लाभकारी और संतुलित होगा।”

सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे ने पहले रिपोर्ट दी थी कि भारत और अमेरिका के बीच एक “अंतरिम व्यापार समझौते” पर 9 जुलाई से पहले हस्ताक्षर हो सकते हैं। यह वही तारीख है जब ट्रंप द्वारा घोषित नए टैरिफ लागू होने की संभावना है, जिससे भारत के निर्यात पर असर पड़ सकता है।

क्या है मामला?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में फिर से राष्ट्रपति पद के लिए अभियान तेज कर दिया है और उन्होंने अपने समर्थकों को लुभाने के लिए चीन, भारत और अन्य व्यापारिक साझेदारों पर ‘टैरिफ वॉर’ जैसी नीति की वापसी के संकेत दिए हैं। प्रस्तावित योजना के अनुसार, अमेरिका भारत से आने वाले कुछ प्रमुख उत्पादों पर 10 से 15 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ा सकता है।

विश्लेषकों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि समय रहते भारत और अमेरिका के बीच कोई समुचित समझौता नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर भारतीय टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और दवा उद्योग पर पड़ सकता है।

राजनीतिक निहितार्थ
राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी पर लगाया गया यह आरोप आगामी मानसून सत्र और 2025 के राज्यों के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में खासा मायने रखता है। कांग्रेस इसे एक राष्ट्रीय सम्मान और आत्मनिर्भरता से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं भाजपा इसे एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास के रूप में देख रही है।

अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे
अब जबकि 9 जुलाई की समय सीमा बेहद करीब है, भारत सरकार के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। क्या भारत अपने हितों से समझौता किए बिना अमेरिका के साथ किसी समझौते तक पहुंचेगा या यह गतिरोध आगे और गहराएगा? यह आने वाला सप्ताह इस दिशा में बड़ा संकेत देगा।

Editor CP pandey

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