देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शनिवार को बलिया जनपद के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों में संस्कृत विषय के पठन – पाठन की स्थिति का संज्ञान लिया गया। इसी क्रम में एक महाविद्यालय से यह ज्ञात हुआ कि वहाँ संस्कृत विषय नामांकन नहीं होने के कारण उस विषय की मान्यता वहाँ रद्द हो गयी। एक बडे़ महाविद्यालय नें बताया कि हमारे यहाँ आचार्य तो हैं पर नामांकन बहुत कम है, नहीं हो पा रहे हैं। आखिर ऐसी स्थिति क्यों है और इसका जिम्मेदार कौन है?संस्कृत विषय के विज्ञान विषय के समान, आंग्ल भाषा के समान कोचिंग केन्द्र क्यों नहीं हैं? हिन्दू धर्म संस्कृति के अनिवार्य होते हुए भी हिन्दू (बहुल) राष्ट्र में इसकी ऐसी दशा कैसे हो गयी?
प्रश्न है सरकार से और समाज से भी कि आखिर जब इतनी योजनाएँ संस्कृत से बच्चों को जोड़ने के लिए संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए चलाइ जा रही हैं ऐसी स्थिति में ऐसा क्यों हो गया?
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)चौरी चौरा थाना क्षेत्र के देवीपुर गांव के पास ट्रक की टक्कर…
क्षेत्राधिकारी नगर संजय कुमार रेड्डी की बाइट देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) जनपद देवरिया के थाना कोतवाली…
पिंक बूथ पर मिशन शक्ति के तहत महिलाओं और बालिकाओं को किया जागरूक, हेल्पलाइन नंबरों…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के देवरिया में शनिवार दोपहर एक सड़क हादसे ने…
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और इंटरनेट के इस्तेमाल को लेकर…
बरहज में दर्दनाक हादसा: ट्रेलर की चपेट में आने से युवक की मौत, भाग रहे…