संस्कृत की दुर्दशा का आखिर कौन है जिम्मेदार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शनिवार को बलिया जनपद के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों में संस्कृत विषय के पठन – पाठन की स्थिति का संज्ञान लिया गया। इसी क्रम में एक महाविद्यालय से यह ज्ञात हुआ कि वहाँ संस्कृत विषय नामांकन नहीं होने के कारण उस विषय की मान्यता वहाँ रद्द हो गयी। एक बडे़ महाविद्यालय नें बताया कि हमारे यहाँ आचार्य तो हैं पर नामांकन बहुत कम है, नहीं हो पा रहे हैं। आखिर ऐसी स्थिति क्यों है और इसका जिम्मेदार कौन है?संस्कृत विषय के विज्ञान विषय के समान, आंग्ल भाषा के समान कोचिंग केन्द्र क्यों नहीं हैं? हिन्दू धर्म संस्कृति के अनिवार्य होते हुए भी हिन्दू (बहुल) राष्ट्र में इसकी ऐसी दशा कैसे हो गयी?
प्रश्न है सरकार से और समाज से भी कि आखिर जब इतनी योजनाएँ संस्कृत से बच्चों को जोड़ने के लिए संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए चलाइ जा रही हैं ऐसी स्थिति में ऐसा क्यों हो गया?

Karan Pandey

Recent Posts

चार महीने पहले मिली थी थाने की कमान, अब थानेदार सूर्यप्रकाश सिंह की मौत से सन्नाटा

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्यप्रकाश सिंह…

2 hours ago

कड़वाहट के बीच संवाद

रिश्तों में रूठापन हो,बातों में तल्ख़ी आती है,दिल के किसी कोने मेंमिलने की आस जगाती…

12 hours ago

नेपाल सैलाब के बाद नहीं थम रहे आंसू, मलबे से उठ रही दुर्गंध; अपनों की तलाश में भटक रहे परिवार

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और सैलाब के बाद तबाही का मंजर…

12 hours ago

प्याज-चीनी की महंगाई से बढ़ी रसोई की चिंता, क्या बफर स्टॉक बनेगा किसान-उपभोक्ता संतुलन का समाधान?

रसोई में महंगाई का तड़का: प्याज 70 रुपये पार, चीनी की तेजी ने बढ़ाई चिंता;…

2 days ago

औद्योगिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने समझी उद्योग जगत की कार्यप्रणाली

बिछुआ (राष्ट्र की परम्परा)। कक्षा में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक…

2 days ago

राखी का संदेश

✍️ विजय गुंजन स्नेह है, अनुराग है, पवित्रता का बंधन है,ममता भरे एक धागे का…

2 days ago