Wednesday, January 28, 2026
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जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

मन की शक्ति के आगे
कोई ताक़त ताकतवर नहीं होती,
रवि किरणें जहाँ नहीं पहुँच पातीं,
कवि की कल्पना वहाँ पहुँच जाती है।

अपनी कल्पना शक्ति का प्रयोग कर
कवि ऐसे स्थानों पर पहुँच जाता है,
जहाँ मनुष्य का पहुँचना असंभव है,
चाहे स्वर्ग लोक हो या भू लोक हो।

कल्पना ही व्यक्ति की सोचने की
शक्ति को विकसित करती है,
इसलिए हर व्यक्ति को सदैव खुले
मन से कल्पनाशील होना चाहिए।

कल्पना वही कर सकता है जिसमें
जिजीविषा हो, जो दृढ़निश्चयी है,
जो क्रियाशील रहता है,
रचनात्मकता उसे कल्पना के लिए प्रेरित करती है।

कवि की कलम में वह शक्ति होती है
कि वह समाज में परिवर्तन और क्रांति
दोनों ला सकता है,
समसामयिक कविता रचकर समाज बदल सकता है।

महाकवि कालिदास ने मेघों को दूत
बना अपनी प्रियतमा के पास भेजा,
यह कवि की कल्पना शक्ति का
ज्वलंत उदाहरण और परिचायक है।

निराला का प्रिय विषय बादल रहा है,
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने तो
मेघों को ही अतिथि मानकर
‘मेघ आए’ कविता की रचना कर डाली।

आकाश में विद्यमान सूर्य की किरणें
उषाकाल से सायंकाल तक
समस्त संसार के कण-कण को
प्रकाशित और आलोकित करती रहती हैं।

पर कवि की कल्पना रवि किरणों को
भी पार कर आकाश की अंतिम
अनंत सीमा को स्पर्श करती है,
जहाँ सूर्य का पहुँचना संभव नहीं।

हमें सदैव कल्पनाशील रहना चाहिए,
हम जितना चिंतन और मनन करेंगे,
हमारी कल्पना शक्ति का उतना ही
अधिक विकास होता जाएगा।

आदित्य कवि-हृदय इंसान को
अपने भीतर के कवि हृदय को
जाग्रत करने की आवश्यकता होती है,
क्योंकि हर इंसान में कवि की कल्पना होती है।

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