

विरासत जरूरी है ताकि सादियों की सदियों तक सनद रहे : प्रोफेसर राजवंत राव
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग में हीरक जयंती वर्ष के अंतर्गत ‘ विरासत वाटिका ‘ स्थापित की गई। यह ‘ विरासत वाटिका ‘ विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग और ‘इंटेक’ के बीच हुए एमओयू का प्रतिफल है। इसके अंतर्गत ऐसे पौधे रोपे गए जो गोरखपुर परिक्षेत्र के भौगोलिक परिवेश में फलने-फूलने के लिए सदैव उपयुक्त रहे हैं। किंतु अब धीरे-धीरे कम या विलुप्त होते जा रहे हैं। मसलन लाल चंदन, कटहरी चंपा, कामिनी, नाशपाती, पनियाला, अंजीर, पलाश, चकोतरा, गंधराज नींबू, सीता अशोक आदि ऐसे 20 पौधे रोपे गए, जिनका हमारी विरासत से गहरा जुड़ाव है। इंटेक एक ऐसा राष्ट्रव्यापी संगठन है जो विरासत संरक्षण के लिए समर्पित है। ‘इंटैक’ विरासत की व्यापक परिभाषा पर काम करता है। इसके अंतर्गत सभ्यता संस्कृति, इतिहास, खानपान, इमारतें, ऐतिहासिक व्यक्तित्व, साहित्य आदि वह सारी चीजें आती हैं जिनका संबंध हमारे गौरवपूर्ण अतीत व वर्तमान से है और जिसका उत्तरदायित्व भावी पीढ़ी को सौंपना है।
इस दूरदर्शी कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने लाल चंदन का पौधा लगाया और कहा कि हमें यह निश्चित रूप से विचार करना होगा कि हम अपनी भावी पीढ़ी को क्या सौंप रहे हैं! जो सत्य, शिव और सुंदर है उसे बचाना हम सब का दायित्व है। न सिर्फ बचाना बल्कि हमें उसके पल्लवन, पोषण व संरक्षण की भी चिंता करनी होगी। हमें ध्यान रखना होगा कि इस धरती पर जो कुछ भी मौजूद है वह सिर्फ हमारे उपभोग के लिए ही नहीं है। हमें उसे आगामी पीढ़ी को भी सौंपना है।
कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संस्कृत व दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राजवंत राव ने कटहरी चंपा का पौधा लगाया और कहा कि इंटैक के साथ हुए एमओयू का आज पहला चरण पूरा हुआ है। दूसरे चरण के अंतर्गत प्राचीन इतिहास विभाग के म्यूजियम का डॉक्यूमेंटेशन और वैज्ञानिक विधि से प्रिजर्वेशन होना है। म्यूजियम का डिजिटाइजेशन होने के बाद भारत के किसी भी कोने में बैठा हुआ व्यक्ति प्राचीन इतिहास विभाग के पुरातात्विक अवशेषों आदि का अवलोकन एवं अध्ययन कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में स्पीड सबसे महत्वपूर्ण चीज हो गई है। जाहिर है कि बहुत अधिक गति में होने पर बहुत कुछ महत्वपूर्ण पीछे छूट जाता है। आसमान छूना हमारा लक्ष्य है लेकिन ध्यान रहे कि पैरों तले जमीन न खिसक जाए। विरासत वाटिका न केवल विद्यार्थियों बल्कि नगर वासियों के लिए भी जीवंत दाय के रूप में दशकों तक मौजूद रहेगी। विरासत जरूरी है ताकि सादियों की सदियों तक सनद रहे।
इंटेक के गोरखपुर परिक्षेत्र के निदेशक महावीर कोंडई ने कहा कि हम पूरी दृढ़ता के साथ अपनी विरासत को सजाने के लिए कटिबद्ध हैं। आज जो विरासत वाटिका स्थापित की गई है, वह जब तक अपनी जड़े न जमा ले, तब तक हम उसकी देखरेख करते रहेंगे।
इंटेक के सह निदेशक अचिंत्य लहिड़ी ने विरासत वाटिका में चार बड़े बेंच स्थापित करने का आश्वासन दिया। तो वहीं आशीष अस्थाना ने दो बैंच लगवाने की घोषणा की। शहर के इन प्रतिष्ठित नागरिकों का लक्ष्य विरासत वाटिका को एक सुंदर केंद्र के रूप में विकसित करने का है।
प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर प्रज्ञा चतुर्वेदी ने स्वागत वक्तव्य दिया। उन्होंने अतिथियों के प्रति आभार भी प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन इंटेक के सदस्य मुमताज़ अली ने किया। इस दौरान अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर अनुभूति दुबे व डॉ. रामवंत गुप्ता मंच पर मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी जयमंगल राव, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अकाउंट ऑफिसर व संपत्ति अधिकारी डॉ.अमित उपाध्याय आदि ने भी विभिन्न पौधे लगाए।
समारोह के दौरान प्राचीन इतिहास विभाग के सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाओं समेत शोधार्थी व छात्र उपस्थित रहे।
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