नागरिकता और पहचान सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेजों की सांकेतिक सूची जारी, जानिए कौन-से अभिलेख होंगे स्वीकार्य
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)सरकार ने नागरिकता, पहचान और मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और विवाद-रहित बनाने के उद्देश्य से आवश्यक अभिलेखों की एक सांकेतिक सूची जारी की है। यह सूची पूर्ण नहीं है, लेकिन नागरिकों को यह स्पष्ट मार्गदर्शन देती है कि सत्यापन के दौरान किन दस्तावेजों को मान्य माना जाएगा। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक भ्रम से राहत मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।
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निर्देशों के अनुसार, यदि किसी प्रकरण में स्वयं, पिता और माता के अभिलेख मांगे जाते हैं, तो तीनों के लिए अलग-अलग स्व-सत्यापित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। केंद्र या राज्य सरकार तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगियों को जारी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश को महत्वपूर्ण प्रमाण माना गया है, क्योंकि ये सरकारी अभिलेखों में दर्ज होते हैं।
इसके अतिरिक्त, 01 जुलाई 1987 से पूर्व भारत में सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र या प्रमाणपत्र दीर्घकालिक निवास का सशक्त प्रमाण माना जाएगा। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट भी स्वीकार्य दस्तावेजों में शामिल हैं, जो जन्मतिथि, जन्मस्थान और पहचान की पुष्टि करते हैं।
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राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र, ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र तथा जहाँ लागू हो राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर भी मान्य होंगे। आधार से जुड़े मामलों में आयोग के पत्र दिनांक 09.09.2025 के निर्देश लागू रहेंगे। वहीं, 01.07.2025 की संदर्भ तिथि के अनुसार बिहार एसआईआर की मतदाता सूची का अंश भी स्वीकार्य दस्तावेज है। यह पहल सत्यापन प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और नागरिक-हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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