ढाका (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बांग्लादेश में 13वां संसदीय चुनाव कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हो गया। सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ मतदान शाम 4:30 बजे तक चला, जिसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। यह बांग्लादेश चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि लंबे समय तक सत्ता में रही अवामी लीग इस बार चुनावी मैदान में नहीं है। ऐसे में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला देश की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
यह चुनाव पिछले कई वर्षों की राजनीतिक उथल-पुथल, जन आंदोलन और सत्ता परिवर्तन के बाद कराया गया है। इसलिए इसे बांग्लादेश के लोकतांत्रिक भविष्य की निर्णायक परीक्षा माना जा रहा है। मतदाताओं को उम्मीद है कि नई सरकार स्थिरता, रोजगार और संस्थागत सुधारों पर ठोस कदम उठाएगी।

अंतरिम सरकार और शीर्ष नेताओं की प्रतिक्रिया
मतदान के दौरान अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने ढाका के गुलशन इलाके में अपनी बेटी के साथ वोट डाला। उन्होंने कहा कि यह दिन “नए बांग्लादेश” के निर्माण का अवसर हो सकता है। यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने करीब 18 महीने पहले सत्ता संभाली थी।
बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान ने भी मतदान कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद जताई। उन्होंने कानून व्यवस्था सुधारने, रोजगार बढ़ाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का वादा दोहराया। वहीं जमात-ए-इस्लामी प्रमुख शफीकुर रहमान ने निष्पक्ष चुनाव की स्थिति में परिणाम स्वीकार करने की बात कही, हालांकि कुछ मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए।
सुरक्षा, हिंसा और चुनाव आयोग का रुख
बांग्लादेश संसदीय चुनाव के दौरान देशभर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए। पुलिस और सेना के संयुक्त बल, ड्रोन, बॉडी कैमरा और सीसीटीवी से निगरानी की गई। इसके बावजूद गोपालगंज और मुंशीगंज में मतदान केंद्रों के पास कच्चे बम फेंके जाने की घटनाएं सामने आईं। चुनाव आयोग ने कहा कि कुल मिलाकर मतदान शांतिपूर्ण रहा और स्थिति नियंत्रण में है।
जनमत संग्रह और अल्पसंख्यक सुरक्षा
इस बार चुनाव के साथ 84 सूत्री सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा और संस्थागत सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदू समाज पर हमलों की खबरों ने चिंता बढ़ाई। अंतरिम सरकार ने पीड़ित परिवारों को सहायता देने की घोषणा की है।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बांग्लादेश चुनाव 2026 देश को स्थिरता, जवाबदेही और आर्थिक सुधार की ओर ले जा सकता है। अब देश और दुनिया की नजर मतगणना और अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
