आभासी माध्यमों की भाषा से मौखिक परंपराओं को चुनौती: प्रो. जीएन देवी

राष्ट्रीय संगोष्ठी में मौखिक परंपराओं पर मंथन, एआई की भाषा को बताया चुनौती

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग एवं आईसीएसएसआर, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “ट्रेडिशन, ट्रांसमिशन एवं ट्रांसफॉर्मेशन: ओरेलिटी एंड इंडीजिनस नॉलेज सिस्टम्स ऑफ साउथ एशिया इन अ ग्लोबल वर्ल्ड” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रोफ़ेसर जी एन देवी ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि मौखिक परंपराओं के प्रसार में आभासी माध्यमों की भाषाएं एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि गोरक्षभूमि में आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। नाथ संप्रदाय का प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से देखा जाता है। महाराष्ट्र में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि मराठी परंपरा में नाथ संप्रदाय के गुरु गहिनीनाथ की गोरखबानी से प्रभावित होकर एक साधारण बालक निरूक्तिनाथ, आगे चलकर नाथ संप्रदाय और वारकरी परंपरा के प्रतिष्ठित संत के रूप में स्थापित हुए। यह परंपरा भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई सीमाओं को पार कर जनमानस की चेतना को गहराई से प्रभावित करती रही है।
परंपरा के संप्रेषण एवं रूपांतरण पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि परंपरा स्थानीय और सुदूर यथार्थ के सम्मिश्रण एवं संचार से समृद्ध होती है। ओरेलिटी को केवल मौखिक ध्वनि तक सीमित न मानते हुए उन्होंने इसे एक व्यापक मानसिक प्रक्रिया बताया, जो मानव की संवेदनाओं, अनुभवों और सांस्कृतिक स्मृतियों से जुड़ी होती है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भाषा को वर्चुअल बताते हुए कहा कि यह मानव भाषण के लिए संभावित खतरा उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि एआई की भाषा आभासी संरचना पर आधारित होती है, जबकि ओरेलिटी वास्तविक मानवीय अनुभव और अभिव्यक्ति से संबंधित है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर नंदिनी साहू ने लोक संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ती शोध संभावनाओं तथा विश्वविद्यालयों में संचालित हो रहे विविध अकादमिक कार्यक्रमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कुलपति प्रोफ़ेसर पूनम टंडन ने स्मारिका का विमोचन करते हुए अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां भाषा, मौखिक परंपरा और स्वदेशी ज्ञान परंपराओं को समझने और संरक्षित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रोफ़ेसर जी एन देवी द्वारा अंग्रेज़ी में लिखित पुस्तक “महाभारत: द एपिक एंड द नेशन” के हिंदी अनुवाद “महाभारत: महाकाव्य एवं राष्ट्र” का लोकार्पण भी किया गया, जिसका अनुवाद अंग्रेज़ी विभाग के पुरातन छात्र हरि प्रताप त्रिपाठी ने किया है।
कार्यक्रम की समन्वयक विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर सुनीता मुर्मू एवं सह-संयोजक प्रोफ़ेसर गौर हरि बेहेरा ने आभार व्यक्त किया। संचालन आयोजक सचिव डॉ. आमोद कुमार राय ने किया।

rkpNavneet Mishra

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