Tuesday, March 31, 2026
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गोद में वान्या, दिल में लक्ष्य: सुषमा ने PCS में 13वीं रैंक से लिखी सफलता की कहानी

पूर्व विधायक स्व० कपिलदेव की पौत्रवधू हैं सुषमा, घर आगमन पर फूल-मालाओं से हुआ जोरदार स्वागत

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)l सुषमा यादवटैग – मऊ, पीसीएस 2024, सफलता, महिला सशक्तिकरण, प्रेरणा, एसडीएम

जिले के कोपागंज विकास खंड के इंदारा गांव की बहू सुषमा यादव ने उत्तर प्रदेश पीसीएस-2024 परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। सात माह की बेटी वान्या को गोद में लेकर साक्षात्कार देने पहुंचीं सुषमा ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी परिस्थिति बाधा नहीं बन सकती।

पूर्व विधायक स्व० कपिलदेव यादव की पौत्रवधू और पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुमित्रा यादव, डॉ० राम बिलास यादव की बहू सुषमा यादव की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनके घर पहुंचते ही ग्रामीणों, शुभचिंतकों और परिजनों ने फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया। गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।

मूल रूप से गोरखपुर के दिव्य नगर की रहने वाली सुषमा यादव के पिता गोपाल यादव व्यवसायी हैं। वर्ष 2022 में उनकी शादी पंकज यादव से हुई, जो एक शिक्षण संस्थान का संचालन करते हैं। सुषमा ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से एमएससी और एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2021 से उन्होंने यूपी पीसीएस की तैयारी शुरू की।

सुषमा बताती हैं कि छात्र जीवन में एक कार्यक्रम के दौरान उपजिलाधिकारी से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी। उसी समय उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का संकल्प लिया। शादी और मातृत्व के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और समय प्रबंधन के जरिए तैयारी को संतुलित किया।

तैयारी के दौरान उन्होंने सीमित संसाधनों में भी निरंतर अध्ययन, नोट्स बनाना, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करना और नियमित मॉक इंटरव्यू पर विशेष ध्यान दिया। साक्षात्कार के दिन भी वह अपनी सात माह की बेटी वान्या को साथ लेकर पहुंचीं, जो उनकी दृढ़ता और समर्पण का प्रतीक बन गया।

सुषमा का कहना है कि परिवार का सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। उनके पति, सास-ससुर और पूरे परिवार ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी बेटी वान्या को भी देती हैं, जिन्हें वह अपना “सौभाग्य” मानती हैं।

सुषमा यादव अब उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के पद पर कार्य करते हुए समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लिए काम करना चाहती हैं। उनकी यह सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज और विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। यह कहानी बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों, तो जिम्मेदारियों के साथ भी सफलता हासिल की जा सकती है।

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