Wednesday, February 18, 2026
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उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2025 काउंसलिंग प्रक्रिया आज से शुरू, रैंक की बाध्यता समाप्त

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2025 के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया बुधवार, 30 जुलाई से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस बार की काउंसलिंग प्रक्रिया छात्रों के लिए कई मायनों में खास और सुविधाजनक साबित होने जा रही है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पहले चरण की काउंसलिंग में अब रैंक की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है, जिससे सभी रैंक के अभ्यर्थी पहले चरण में ही भाग ले सकेंगे।

इस वर्ष बीएड में दाखिले के लिए राज्य भर के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी कॉलेजों की कुल मिलाकर 2.30 लाख से अधिक सीटों पर दाखिला किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को दो चरणों में सम्पन्न कराया जाएगा। पहले चरण में अभ्यर्थियों को बिना रैंक सीमा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने और अपनी पसंद के कॉलेजों का चयन करने की अनुमति दी गई है। यह निर्णय अभ्यर्थियों को अधिक विकल्प और स्वतंत्रता देने के उद्देश्य से लिया गया है।

काउंसलिंग प्रक्रिया की प्रमुख जानकारी प्रारंभ तिथि: 30 जुलाई 2025 चरण: दो चरणों में पूरी काउंसलिंग। सीटें: 2.30 लाख से अधिक
नई व्यवस्था: सभी रैंक वाले छात्र पहले चरण में भाग ले सकते हैं
माध्यम: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी
वेबसाइट: upbed2025.in (उदाहरण स्वरूप)
प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों को वेबसाइट पर जाकर समय रहते रजिस्ट्रेशन, विकल्प चयन, डॉक्यूमेंट अपलोड और शुल्क भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद कॉलेज आवंटन की सूचना जारी की जाएगी।

बीएड संयोजक प्रो. [नाम] ने बताया कि रैंक बाध्यता हटाने से छात्रों को अधिक लचीलापन मिलेगा और मेरिट के आधार पर पारदर्शी तरीके से सीट आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने यह भी अपील की है कि सभी छात्र समय से पोर्टल पर जाकर अपने दस्तावेज अपलोड करें और विकल्प भरें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

विशेष सुझाव:
सभी अभ्यर्थी काउंसलिंग शेड्यूल और दस्तावेजों की सूची ध्यानपूर्वक पढ़ें।
ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सक्रिय रखें।काउंसलिंग शुल्क और सीट कन्फर्मेशन समय पर करें, अन्यथा आवंटन रद्द हो सकता है।

निष्कर्षतः, इस वर्ष की बीएड काउंसलिंग प्रक्रिया जहां एक ओर तकनीकी रूप से सरल की गई है, वहीं रैंक बाध्यता खत्म होने से छात्रों के लिए अधिक अवसर भी खुले हैं। यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और अवसर की समानता की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है।

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