US Immigration Case: कैलिफोर्निया कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना सुनवाई हिरासत में रखे गए दो भारतीय नागरिक रिहा

कैलिफोर्निया/अमेरिका (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित फेडरल कोर्ट ने इमिग्रेशन अधिकारियों को दो भारतीय नागरिकों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बिना नोटिस और सुनवाई के हिरासत में रखना अमेरिकी संविधान में निहित उचित प्रक्रिया (Due Process) का संभावित उल्लंघन है।

यह आदेश ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के बाद अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियां सख्त कर दी गई हैं और ICE (Immigration and Customs Enforcement) ने प्रवासियों पर निगरानी तेज कर दी है। इससे पहले इसी मामले में कोर्ट ने तीन अन्य भारतीय नागरिकों को भी रिहा करने का आदेश दिया था।

किरणदीप को तुरंत रिहा करने का आदेश

पूर्वी कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला न्यायालय के चीफ जज ट्रॉय एल. ननली ने किरणदीप, जो कि भारतीय नागरिक हैं, को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, किरणदीप दिसंबर 2021 में अमेरिका आई थीं और उन्होंने शरण के लिए आवेदन किया था।

जांच के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन उस वक्त इमिग्रेशन अधिकारियों ने यह माना था कि वह न तो समुदाय के लिए खतरा हैं और न ही फरार होने का जोखिम है। किरणदीप पिछले चार वर्षों से कैलिफोर्निया में रह रही थीं और ICE व USCIS के सभी निर्धारित चेक-इन में समय पर शामिल होती रही थीं। वह अपने साझेदार के साथ कैलिफोर्निया में रहती थीं।

रूटीन चेक-इन के दौरान गिरफ्तारी

सितंबर 2025 में किरणदीप को एक रूटीन ICE चेक-इन के दौरान हिरासत में लिया गया। अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वह एक तय तारीख पर पेश नहीं हुई थीं, हालांकि उन्होंने अपनी अनुपस्थिति का उचित कारण बताया और अगले ही दिन चेक-इन किया, जिसे ICE ने उस समय स्वीकार भी कर लिया था।

जज ननली ने कहा कि बिना सुनवाई के लगातार हिरासत में रखना संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन हो सकता है। कोर्ट ने किरणदीप को न सिर्फ रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि बिना नोटिस दोबारा गिरफ्तार करने पर भी रोक लगा दी।

रोहित को भी मिली राहत

एक अलग फैसले में जज ननली ने रोहित, एक अन्य भारतीय नागरिक, को भी रिहा करने का आदेश दिया। रोहित नवंबर 2021 में बिना निरीक्षण अमेरिका पहुंचे थे और उन्होंने भारत में राजनीतिक उत्पीड़न का डर जताते हुए शरण मांगी थी।

रोहित को जून 2025 में हिरासत में लिया गया था और वह बिना बॉन्ड सुनवाई के सात महीने से अधिक समय तक कस्टडी में रहे।
कोर्ट ने पाया कि रोहित के समुदाय से मजबूत संबंध हैं और सरकार यह साबित करने में नाकाम रही कि उनकी लगातार हिरासत क्यों जरूरी है। जज ने कहा कि बिना प्रक्रिया के हिरासत में रखना गलत तरीके से आजादी छीनने का गंभीर खतरा पैदा करता है और तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

दोनों मामलों में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब इमिग्रेशन अधिकारी किसी व्यक्ति को कस्टडी से रिहा करते हैं, तो उस व्यक्ति को स्वतंत्रता का संरक्षित अधिकार प्राप्त हो जाता है और उसे मनमाने ढंग से फिर से हिरासत में नहीं लिया जा सकता।

Karan Pandey

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