ऑपरेशन सिन्दूर की गौरवगाथा पर निकली अद्वितीय देशभक्ति यात्रा

भाटपार रानी/ देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l पूर्वांचल की पावन धरा पर मंगलवार को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब पी.डी.आर.डी. इंटर कॉलेज एवं आर.एस. इंटरनेशनल स्कूल रतसिया कोठी के संयुक्त तत्वावधान में ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की शानदार सफलता पर एक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। जो केवल एक रैली नहीं बल्कि एक विचार केरूप में सामने आया– जिसमें एक संकल्प था, जो नन्हे हाथों में तिरंगा थामे गांव-गांव गूंजता ही चला गया। वहीं इस ऐतिहासिक रैली को झंडा दिखाकर रवाना किया उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के संरक्षक, रेड क्रॉस देवरिया के उप सभापति एवं दो बार के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. तेज प्रताप सिंह ने।उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को स्वर्णिम आयाम दिया। उनके व्यक्तित्व की गरिमा, वाणी की गंभीरता और दृष्टिकोण की ऊंचाई ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।डॉ. सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा: “भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि भावनाओं का महासागर है। ऑपरेशन सिन्दूर भारतीय सेना की शौर्यगाथा है, और यह तिरंगा यात्रा उस गाथा को जन-जन तक पहुंचाने का सेतु। जब छोटे-छोटे बच्चों की आंखों में देश के लिए सपना हो और हाथों में तिरंगा – तब यकीन हो जाता है कि भारत अमर है।” तिरंगे की छांव में निकली यह यात्रा इंदरवा, किशोरी, नैनहा, भटवलिया, रतसिया और चंदाचक जैसे गांवों से होकर गुज़री। रास्ते भर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा, नारे और तालियों से स्वागत कर बच्चों के जोश को सातवें आसमान तक पहुंचा दिया। वातावरण में “वंदे मातरम्”, “जय हिंद” और “भारत माता की जय” की गूंज ऐसी थी, मानो पूरा क्षेत्र राष्ट्रप्रेम में सराबोर हो चला हो।इस भव्य आयोजन के प्रेरणास्त्रोत संस्थान के प्रबंधक चंद्र प्रताप सिंह रहे, जिन्होंने हर गांव में बच्चों के साथ चलकर लोगों को ऑपरेशन सिन्दूर की महत्ता से अवगत कराया। साथ ही उन्होंने कहा: “देशप्रेम वह दीप है जो दिलों में जलता है, लेकिन जब यह दीप रैली बनकर गांव-गांव रोशनी फैलाता है, तब वह क्रांति बन जाता है। ऑपरेशन सिन्दूर वीरता की अमर कथा है और इस यात्रा के माध्यम से हमने उसे पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंचाने का प्रयास किया है।”
विद्यालय की प्रधानाचार्या शिवानी सिंह ने भी इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए कहा “जब शिक्षा में संस्कार जुड़ते हैं, तब ही सच्चे नागरिक बनते हैं। ऑपरेशन सिन्दूर की सफलता के बहाने विद्यालय परिवार ने बच्चों को किताबों से बाहर निकाल कर उन्हें देशभक्ति का जीवंत पाठ पढ़ाया।”यह आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं था – यह राष्ट्र की आत्मा का उत्सव था। बच्चों की मुस्कान में भारत का उज्ज्वल भविष्य झलक रहा था, और उनके कदमों की थाप में देश की तरक्की की गूंज सुनाई दे रही थी।
यह यात्रा थी श्रद्धा की, समर्पण की और स्वाभिमान की। यह यात्रा एक संदेश थी – कि तिरंगा हमारे लिए शान नहीं, पहचान है। और जब यह पहचान नन्हे हाथों में होती है, तो आने वाला कल निश्चित ही स्वर्णिम होता है।

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

PWD निर्माण कार्यों में रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदारों की बढ़ी चिंता

उत्तर प्रदेश के ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, उपखनिज रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था पर तत्काल…

9 hours ago

व्यथा धरा की

सुन कर मन की व्यथा धरा की ,आकाश को रोना पड़ेगाएक दिन ऐसा आएगाजब क्षितिज…

9 hours ago

प्रतिरोध स्वयं  का

✍️ सोनम सोनी आज मन का सागर शांतहो गया --- क्यों ।वो उथल-पुथल, हलचल हलचल,उलझन…

9 hours ago

सरकारी योजना का लाभ पाने का मौका, जरूरी दस्तावेजों के साथ 31 जुलाई को पहुंचें हाटा

कुशीनगर।(राष्ट्र की परम्परा) जनपद के दिव्यांगजनों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश शासन…

2 days ago

यात्रियों की सुरक्षा के लिए देवरिया स्टेशन पर चला विशेष चेकिंग अभियान

देवरिया रेलवे स्टेशन पर चला सघन सुरक्षा अभियान, डॉग स्क्वाड व बम निरोधक दस्ते ने…

2 days ago