मेरी रचना, मेरी कविता
——X——
आज ज़माना क्या फिर आयेगा,
राधा कृष्ण का त्याग बतलायेगा,
निष्काम प्रेम की वो आधारशिला,
जो नि:स्वार्थ जीवनपर्यंत निभायेगा।
मित्रता की नींव अगर भावनाओं से,
जुड़ी है तो इसका टूटना मुश्किल है,
और अगर यह स्वार्थ से जुड़ी हुई है,
तो इसका टिकना बहुत मुश्किल है।
हर सुबह हर शाम हर किसी
के लिए सुहानी नहीं होती है,
हर दोस्ती हर प्यार के पीछे
कोई कहानी भी नहीं होती है।
परंतु कुछ तो असर होता है,
प्रेमी आत्माओं के मिलन का,
जैसे गोरी गोरी राधिका का,
कृष्ण साँवरे की दीवानगी का।
हर सुबह हर शाम गुनगुनाया करो,
राधा कृष्ण के प्रेम गीत गाया करो,
सुबह और शाम भी सुहानी होगी,
प्रेम हेतु क़िस्मत आजमानी होगी।
उनका जैसा प्रेम कोई कर पायेगा,
बर्साने या द्वारिका में वे रह पायेंगे,
आदित्य द्वापर नहीं यह कलियुग है,
सतयुग, त्रेता, द्वापर लौट न आययेंगे।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रव्यापी…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत सरकार और उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा…
भलुअनी(राष्ट्र की परम्परा)l बरहज विधानसभा के भलुअनी ब्लॉक के पोखरभीडा गाँव में चौहान टोले पर…
नशामुक्त भारत के लिए युवाओं से जुड़े प्रधानमंत्री, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में सुना गया वर्चुअल…
देवरिया रेलवे स्टेशन पर लूट की वारदात का आरोपी गिरफ्तार, जीआरपी की कार्रवाई से यात्रियों…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी…