पराली जलाने पर अंकुश लगाने हेतु डीएम ने वीसी के माध्यम से अधिकारियों संग की बैठक

02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2500/- 02 एकड़ से 5 एकड़ तक के 5000/- तथा 05 एकड़ से अधिक के लिए 15000/- की क्षतिपूर्ति वसूली का निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी अनुनय झा द्वारा पराली जलाने की घटनाओं के संदर्भ में सभी एसडीएम, बीडीओ और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ वीसी के माध्यम से बैठक कर पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने सभी एसडीएम को लेखपालों को सक्रिय करते हुए पराली जलाने वालों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्यवाही का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जो भी कंबाइन मशीन बिना पराली प्रबन्धन प्रणाली के चल रही हैं, उन्हें तत्काल सीज किया जाए। इसके अलावा पराली जलाने वालों पर नियमानुसार जुर्माना अर्थदंड की भी कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि पराली जलने से न सिर्फ पर्यावरण को खतरा उत्पन्न हो रहा है, बल्कि लोक व्यवस्था के लिए समस्या भी उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने उपनिदेशक कृषि को सचल दल को क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से सक्रिय करने हेतु कड़ा निर्देश दिया। कहा कि न्याय पंचायतवार गोष्ठियों का गठन करें और विभिन्न माध्यमों से प्रचार– प्रसार कर लोगों को पराली न जलाने हेतु जागरूक करें। खंड विकास अधिकारियों को गोशालाओं तक पराली पहुंचाने का प्रबंध प्रधानों के माध्यम से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने हार्वेस्टर मालिकों के साथ तत्काल सभी तहसीलों में एसडीएम की अध्यक्षता में बैठक करवाने का निर्देश दिया। इससे पूर्व जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि फसलों के अवशेष जलाये जाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की प्रभावी रोकथाम किये जाने हेतु सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। जिलास्तर पर अपर जिलाधिकारी,तहसील पर उप जिलाधिकारी एवं विकास खण्ड स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में कृषि, राजस्व, पुलिस एवं अन्य विभागों के कर्मचारी वअधिकारियों की ड्यूटी लगायी गयी है। सभी को निर्देशित किया गया है कि पराली की घटनाओं के रोकथाम के लिये प्रत्येक स्तर पर प्रभावी कार्यवाही की जाय। समस्त थानाध्यक्षों को क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम तथा पराली जलाने की घटना प्रकाश में आने पर संबंधित कृषक व कम्बाइन हार्वेस्टर स्वामी पर नियामानुसार आवश्यक कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है। सैटेलाइट से प्राप्त प्रत्येक घटना पर कृषि विभाग के कर्मचारी एवं राजस्व विभाग के लेखपाल द्वारा सत्यापन कर राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा 24 के अन्तर्गत क्षतिपूर्ति की वसूली एवं धारा-26 के अन्तर्गत उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर सम्बन्धित के विरूद्ध अर्थदण्ड इत्यादि दण्डात्मक कार्यवाही की जा रही है। इसमें 02 एकड़ से कम क्षेत्र के लिये रू० 2500/-. 02 से 05 एकड़ क्षेत्र के लिये रू० 5000/- और 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिये रू० 15000/- तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली के निर्देश हैं। कृषि विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा कृषक बन्धुओं को प्रेरित किया जा रहा है कि धान की कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन में सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम लगाये अथवा कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबन्धन के यंत्रों का प्रयोग खेत में अवश्य किया जाए। उक्त के अतिरिक्त ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में अपने क्षेत्र में पराली न जलने दें तथा कृषकों को अवगत करायें कि फसल अवशेष,पराली जलाना एक दण्डनीय अपराध है।

Karan Pandey

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