नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) संसद के मानसून सत्र में सोमवार को गहमागहमी उस समय तेज हो गई जब गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक के तहत प्रावधान किया गया है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए जाने पर 30 दिन से अधिक की सजा होती है, तो उन्हें अपने पद से हटना होगा।

गृह मंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक को लाने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल रही है। शाह ने सदन में कहा— “प्रधानमंत्री ने स्वयं आग्रह किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस दायरे में शामिल होना चाहिए। सवाल यह है कि क्या संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जेल से शासन करें, यह उचित है?”

विपक्ष का कड़ा विरोध

विधेयक पेश होते ही विपक्षी दलों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राजद, आप और अन्य विपक्षी दलों ने इसे “असंवैधानिक” करार देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा इस कानून का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों को अस्थिर करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए करेगी। विपक्षी सांसदों का कहना था कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर नेताओं को झूठे मामलों में जेल भेजा जाएगा और इस विधेयक का सहारा लेकर उन्हें पद से हटाया जाएगा।

सदन का माहौल

जैसे ही अमित शाह ने विधेयक प्रस्तुत किया, विपक्षी सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे और लोकतंत्र की मूल आत्मा पर हमला है। वहीं, भाजपा सांसदों ने विपक्ष पर “भ्रष्टाचारियों को बचाने” का आरोप लगाया।

आगे की राह

विधेयक पर अब संसदीय समिति में चर्चा होगी या सीधे मतदान के लिए लाया जाएगा, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना तय है कि इस विधेयक को लेकर आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक राजनीति और भी गरमाएगी।