Monday, March 2, 2026
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श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास के गठन का रास्ता साफ, सरकार ने जारी किया अध्यादेश

लखनऊ/वृंदावन,(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास के गठन का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। मंगलवार को जारी अध्यादेश के तहत मंदिर की सम्पूर्ण संपत्तियों, चढ़ावे और प्रबंधन का अधिकार न्यास को सौंपा जाएगा।

अध्यादेश के अनुसार, मंदिर में स्थित मूर्तियां, परिसर, सीमा के भीतर की जमीन-जायदाद, देवताओं को मिली भेंट-उपहार, धार्मिक कार्यक्रमों हेतु प्राप्त संपत्ति, नकद या वस्तु रूप में अर्पित चढ़ावा, डाक, बैंक ड्राफ्ट, चेक या ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त दान, आभूषण, हुंडी से मिली रकम, अनुदान और योगदान—सभी का प्रबंधन और नियंत्रण अब न्यास के पास होगा।

सरकार का कहना है कि यह कदम स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही, मंदिर में वर्तमान रीति-रिवाज, समारोह, त्योहार और अनुष्ठान बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगे। भगवान बांके बिहारी के दर्शन समय, पुजारियों की नियुक्ति, उनका वेतन-भत्ता और अन्य व्यवस्थाएं भी न्यास द्वारा तय की जाएंगी। मंदिर की सुरक्षा, प्रशासन और प्रबंधन की संपूर्ण जिम्मेदारी भी न्यास को सौंपी जाएगी।

श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
न्यास के गठन के बाद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक विकास योजनाएं लागू की जाएंगी। इनमें प्रसाद वितरण केंद्र, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, साफ पेयजल, आराम के लिए बेंच, आसान पहुंच और कतार प्रबंधन के लिए कियोस्क शामिल होंगे। इसके अलावा गौशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोईघर, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय भी विकसित किए जाएंगे।

न्यास की बैठक और आर्थिक अधिकार
नए मंदिर न्यास की बैठक हर तीन महीने में होगी और बैठक की तारीख तय होने से कम से कम 15 दिन पहले सभी सदस्यों को नोटिस भेजा जाएगा। आर्थिक मामलों में न्यास को 20 लाख रुपये तक की चल-अचल संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा, जबकि इससे अधिक राशि के लिए सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।न्यास के संचालन के लिए एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाएगा, जो एडीएम स्तर के अधिकारी होंगे।सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल मंदिर की व्यवस्थाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि श्रद्धालुओं को भी बेहतर और सुगम दर्शन अनुभव मिलेगा।

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