संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के साथा ब्लॉक के राजस्व गांव पिपरा में स्थित पुराना सार्वजनिक कुआं लापरवाही और उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। वर्षों से गांव की प्यास बुझाने वाला यह कुआं आज खुद मदद का मोहताज है। कुएं की मुंडेर टूट चुकी है, भीतर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कुआं न सिर्फ ऐतिहासिक और उपयोगी धरोहर है, बल्कि गर्मी के दिनों में पानी का अहम स्रोत भी रहा है। लेकिन लंबे समय से साफ-सफाई और मरम्मत के अभाव में यह पूरी तरह उपेक्षित पड़ा है। बच्चों और मवेशियों के लिए यह स्थान खतरनाक बन चुका है, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों ने कई बार पंचायत और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। गांववासियों की मांग है कि कुएं की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, गिरे पेड़ को हटाया जाए और मुंडेर की मरम्मत कर सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि किसी अनहोनी से पहले इस सार्वजनिक संपत्ति को बचाया जा सके।
अब सवाल यह है कि पिपरा गांव के इस उपेक्षित कुएं पर कब पड़ेगी जिम्मेदार लोगों की निगाहें?
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