देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। दूरदर्शन व आकाशवाणी से जुड़े शास्त्रीय संगीत गायक पंडित हरीश तिवारी ने कहा कि बदलते दौर में कलाकार वही प्रस्तुत करते हैं, जिसमें श्रोताओं की रुचि होती है। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी का रुझान शास्त्रीय संगीत, ठुमरी, गजल, दादरा, कजरी और चैती से हटकर फूहड़ गीतों की ओर बढ़ रहा है, जिस पर नियंत्रण आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत साधना और अनुशासन का विषय है, जिसे समझने और आत्मसात करने में समय लगता है। गुरुवार को नागरी प्रचारणी के मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी के न्यू कॉलोनी स्थित आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।
पंडित तिवारी ने कहा कि पूर्व के महान गायक मन्ना डे, मुहम्मद रफी और किशोर कुमार के गीत आज भी परिवार के साथ बैठकर सुने जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान समय में कई ऐसे गीत बन रहे हैं जिन्हें पारिवारिक माहौल में सुनना कठिन हो गया है। उन्होंने इस स्थिति में सुधार के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कलाकार का उद्देश्य अपनी कला का प्रदर्शन करना होता है, लेकिन प्रस्तुति का स्वरूप श्रोताओं की पसंद से प्रभावित होता है। इसलिए जरूरी है कि समाज में शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत के प्रति रुचि को पुनर्जीवित किया जाए।
पंडित हरीश तिवारी भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी, पंडित ठाकुर चौबे, अजीत भट्टाचार्य, आचार्य नन्दन और पंडित कुंदन लाल शर्मा को गुरु मानते हैं। उन्होंने देश के विभिन्न महानगरों जैसे मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और वाराणसी में मंचीय प्रस्तुतियां दी हैं और कई पुरस्कार भी हासिल किए हैं।
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