Tuesday, January 13, 2026
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सृष्टि को हिला देने वाला वह क्षण जब देवता भी हुए नतमस्तक

🕉️ जब पुत्र का अभिमान हुआ माता पार्वती की परीक्षा

धर्म / भक्ति / आस्था



🌺 दिव्य कथा का दूसरा अध्याय — गणेश जी की उत्पत्ति के बाद क्या हुआ?

भगवान गणेश — विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलमूर्ति के रूप में पूजे जाने वाले देवता। उनके जन्म की कथा जितनी अद्भुत है, उतनी ही प्रेरणादायक भी। पहले भाग में हमने पढ़ा कि किस प्रकार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की, और उस बालक ने देवाधिदेव महादेव के मार्ग में रुकावट डाली। इस घटना ने सृष्टि के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा।
अब प्रस्तुत है — “गणेश जी की कथा ”, जिसमें हम जानेंगे उस क्षण के बाद क्या हुआ जब भगवान शिव ने क्रोध में आकर गणेश का सिर काट दिया।
जब माता पार्वती का क्रोध हिला गया त्रिलोक
जैसे ही माता पार्वती ने देखा कि उनके प्रिय पुत्र का सिर धड़ से अलग हो गया है, उनका हृदय पीड़ा से भर उठा। उनके क्रोध की ज्वाला से पूरा ब्रह्मांड कांप उठा। देवी के रोदन से दिशाएँ थर्रा उठीं, देवता भयभीत हो उठे।
माता ने कहा —
“हे देवाधिदेव! आपने मेरे पुत्र को बिना किसी अपराध के नष्ट कर दिया। अब मैं इस सृष्टि का नाश कर दूंगी!”
माता पार्वती के इस संकल्प से समस्त देवता संकट में पड़ गए। ब्रह्मा, विष्णु और समस्त देवता मिलकर माता को शांत करने पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव से विनती की कि वे किसी उपाय से बालक को पुनर्जीवित करें।
🐘 जब हाथी का सिर बना गणेश का जीवन
भगवान शिव ने करुणा भाव से आदेश दिया —
“उत्तर दिशा में जो पहला जीव मिले, उसका सिर लाकर इस बालक के शरीर से जोड़ दो।”
देवता उस दिशा में गए और उन्हें वहाँ एक विशाल, निर्दोष हाथी का बच्चा मिला। उसका सिर लाकर गणेश के शरीर से जोड़ दिया गया। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से जीवन-संवेदना दी और गणेश बालक पुनः जीवित हो उठे।
माता पार्वती की आँखों में आनंद के आँसू झलक उठे। उनके हृदय में मातृत्व की कोमलता और गर्व एक साथ भर उठा।
🌼 देवताओं ने किया गणेश जी का अभिषेक
बालक के पुनर्जन्म के बाद सभी देवताओं ने उनकी महिमा का गान किया। ब्रह्मा जी ने उन्हें “विघ्नहर्ता” की उपाधि दी, विष्णु जी ने कहा —
“जहाँ गणेश का नाम लिया जाएगा, वहाँ सफलता और समृद्धि अपने आप आएगी।”
भगवान शिव ने भी घोषणा की —
“जो भी कार्य आरंभ में गणेश का स्मरण करेगा, उसके सभी कार्य बिना विघ्न के पूर्ण होंगे।”
इस प्रकार गणेश जी समस्त देवताओं में ‘अग्रपूज्य’ कहलाए — अर्थात जिनकी पूजा सबसे पहले की जाती है।
🪔 इस कथा का संदेश
गणेश जी की कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि जीवन का गहरा दर्शन है। यह हमें सिखाती है कि अहंकार, प्रेम, त्याग और करुणा सभी एक ही सूत्र में बंधे हैं। माता पार्वती की मातृभावना, शिव का संयम और गणेश का पुनर्जन्म — यह सब मिलकर जीवन की सच्चाई बताते हैं कि विनाश के बाद ही सृजन की राह खुलती है।

गणेश जी के जीवन की यह कथा केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि हर मनुष्य के जीवन में एक प्रेरणा है। संकटों से जूझते हुए जब हम श्रद्धा, धैर्य और विनम्रता को अपनाते हैं, तभी सच्चे अर्थों में “विघ्नहर्ता गणेश” हमारे जीवन में प्रवेश करते हैं।

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