तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा नहीं, सफलता का आधार: सकारात्मक सोच की असली ताकत


गोंदिया। आधुनिक डिजिटल युग में जहां विज्ञान और तकनीक ने दुनिया को नई दिशा दी है, वहीं आज भी कुछ अंधविश्वास और गलत धारणाएं समाज में गहराई से जमी हुई हैं। “तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा” और 13 अंक को अशुभ मानना भी ऐसी ही एक सोच है। लेकिन यदि हम गहराई से देखें तो यही अंक अनेक सफलताओं और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक भी हैं।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी के अनुसार, जीवन में सफलता का आधार अंधविश्वास नहीं बल्कि सकारात्मक सोच है। हम जैसा सोचते हैं, हमारा मन वैसा ही बनता है। मन एक शक्तिशाली ऊर्जा है, जिसमें यदि विश्वास, आशा और अच्छे विचारों का समावेश हो, तो सफलता स्वतः मिलती है।
भारत में प्राचीन काल से मान्यताओं, परंपराओं और अंकों का विशेष महत्व रहा है। समय के साथ कई कुप्रथाओं को समाप्त करने के प्रयास हुए, लेकिन कुछ धारणाएं आज भी बनी हुई हैं। इनमें 3 और 13 अंक को लेकर फैली भ्रांतियां प्रमुख हैं।
यदि हम इतिहास पर नजर डालें तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जीवन में 13 अंक का विशेष महत्व रहा। उन्होंने 13 मई 1996 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, 13 दिन में सरकार गिरी, फिर 13 महीने बाद पुनः प्रधानमंत्री बने और बाद में 13 अप्रैल 1999 को शपथ लेकर पूर्ण कार्यकाल पूरा किया। यह दर्शाता है कि कोई भी अंक शुभ या अशुभ नहीं होता, बल्कि हमारी सोच उसे ऐसा बनाती है।
तीन अंक का सकारात्मक पक्ष
तीन का महत्व हमारे जीवन और संस्कृति में हर जगह दिखाई देता है।
त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु, महेश;
त्रिदेवी—लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती;
त्रिशूल, तीन परिक्रमा, तीन बार आरती—ये सभी सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं।
प्रकृति और विज्ञान भी तीन के महत्व को दर्शाते हैं—
जल के तीन रूप (ठोस, द्रव, गैस),
समय के तीन काल (भूत, वर्तमान, भविष्य),
सिग्नल के तीन रंग (लाल, पीला, हरा)।
जीवन की अवस्थाएं भी तीन हैं—बाल्यकाल, युवावस्था और वृद्धावस्था। यह दर्शाता है कि तीन संख्या संतुलन और पूर्णता का प्रतीक है।
नकारात्मक सोच का प्रभाव
कुछ लोग तीन को नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं—जैसे “तीन लोग साथ न निकलें” या “तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा”। यह केवल मानसिक भ्रम है। वास्तविकता यह है कि कोई भी संख्या हमारे कार्य को प्रभावित नहीं करती, बल्कि हमारी सोच और प्रयास ही परिणाम तय करते हैं।
सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी
यदि हम अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में मोड़ें, तो वही अंक जो हमें डराते हैं, हमारी सफलता का कारण बन सकते हैं।
विचारों की माला विश्वास के फूलों से बनती है।
जब इसमें प्रेम और आशा जुड़ जाती है, तो जीवन में खुशी स्वतः आ जाती है।
निष्कर्ष
“तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा” जैसी कहावतों से बाहर निकलकर हमें सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए। आधुनिक युग में सफलता का मूल मंत्र यही है कि हम अंधविश्वासों से दूर रहें और अपने मन को मजबूत बनाएं।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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