Wednesday, February 11, 2026
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गरीबों के पक्के मकान का सपना अब भी अधूरा

खुले आसमान के नीचे खाना बनाने को मजबूर

प्रधानमंत्री आवास योजना में क्या इस बार सर्वे में गरीबों को मिल पायेगा सरकारी आवास

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सरकार ने इसी उम्मीद के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की थी कि प्रत्येक गरीब व पात्र व्यक्ति के रहने के लिए पक्का आशियाना हो, वहीं गरीब भी यहीं उम्मीद लगाए बैठें हैं कि उन्हें रहने के लिए सिर पर पक्की छत मिलेगीं । लेकिन सच तो यह हैं कि आज भी गरीब व पात्र व्यक्ति तो योजना का लाभ लेने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। गांव की राजनीति का शिकार होकर पात्र होने के बाद भी आवास योजना से वंचित हो जा रहे।
ऐसा ही एक मामला लक्ष्मीपुर ब्लाक अंतर्गत मानिक तालाब गांव का है। जहां रहने वाले विजय राजभर के परिवार ने बताया कि वे 20 सालों से यहां निवास कर रहा, उसके परिवार में पत्नी और कुल तीन बच्चे है।दैनिक व्यवसाय करके जीवन यापन कर रहा। उसके पास रहने के लिए पक्की छत नसीब नहीं हो पा रहा। उसकी पत्नी शीला ने बताया कि उन्हे मजबूरन खुले आसमान के नीचे चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता है।बरसात के दिनों में स्थिति और भी दूभर हो जाती है। दूसरे के घर जाकर सहारा लेना पड़ता है। अगर उन्हें भी सरकारी पक्की छत मिलती तो अपना जीवन निर्वहन अच्छे से कर पाते। पति विजय ने बताया की कई बार उसने आवास के लिए जिम्मेदारों से कहा लेकिन गांव के वोटों की राजनीति के वजह से उसे पात्र होते हुए भी वंचित कर दिया गया। इस बार भी अभी तक उसका सर्वे नहीं हुआ हैं। जिम्मेदारों से कहने पर सिर्फ आश्वासन मिलता हैं।
इस सम्बन्ध में गांव के जिम्मेदार प्रधान से इनकी पात्रता के सम्बन्ध में पूछने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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