लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों में NOTA (None of the Above) विकल्प लागू करने और बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों के नाम छापने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता सुनील मौर्य ने दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान व्यवस्था मतदाताओं में अनावश्यक भ्रम उत्पन्न करती है और मताधिकार की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े करती है।
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याचिका में तर्क दिया गया है कि पंचायत चुनावों में अभी केवल चुनाव चिह्न ही बैलेट पेपर पर छपते हैं, जबकि प्रत्याशियों के नाम नहीं दर्ज होते। ऐसी स्थिति में ग्रामीण मतदाता अक्सर चुनाव चिह्नों को लेकर उलझन में पड़ जाते हैं, जिससे सही प्रत्याशी की पहचान करना कठिन हो जाता है। अधिवक्ता मौर्य ने इसे “मतदाता की स्वतंत्र और सूचित पसंद” के अधिकार का उल्लंघन बताया।
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याचिका में कहा गया है कि NOTA का अभाव लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करता है, क्योंकि मतदाता के पास असंतोष जताने का वैकल्पिक साधन नहीं रहता। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आम चुनावों में NOTA लागू किए जाने का हवाला देते हुए पंचायत चुनावों में भी इसे जरूरी बताया गया है।
हाईकोर्ट में आज इस जनहित याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोर्ट इस पर सकारात्मक रुख अपनाता है, तो पंचायत चुनाव प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण लोकतंत्र में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और मतदाता सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी।
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