वर्तमान भ्रम की रेखा: सच, स्क्रीन और समाज के बीच खिंची अदृश्य लकीर

✍️ कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज का समय सूचना का युग कहलाता है, लेकिन paradox यह है कि जानकारी की रफ्तार के साथ-साथ भ्रम भी उतनी ही तेजी से फैल रहा है। सच और झूठ के बीच की दूरी धुंधली हो चुकी है। एक ऐसी अदृश्य रेखा खिंच गई है, जिसे हम देख नहीं पाते—लेकिन उसी पर चल रहे हैं। यही है वर्तमान का सबसे बड़ा संकट: सूचना बहुत है, विवेक कम।

समाज अब वास्तविकता से अधिक आभासी दुनिया पर भरोसा करने लगा है। मोबाइल स्क्रीन पर दिखने वाला हर संदेश, हर वीडियो और हर पोस्ट मानो अंतिम सत्य बन जाता है। बिना पड़ताल विचार बनते हैं, बिना सत्यापन निर्णय लिए जाते हैं। परिणामस्वरूप सूचना और अफवाह के बीच का फर्क मिटता जा रहा है—और यहीं से भ्रम की रेखा और गहरी होती जाती है।

राजनीति हो या समाज, शिक्षा हो या अर्थव्यवस्था—हर क्षेत्र में छवि-निर्माण का खेल तेज है। असली मुद्दे पीछे छूटते हैं, भावनात्मक शोर आगे आ जाता है। जनता कभी जाति, कभी धर्म, तो कभी विकास के नाम पर उलझी रहती है। सवाल पूछने की आदत कमजोर पड़ रही है, जबकि लोकतंत्र का मूल आधार प्रश्न और विमर्श ही हैं।

यह भ्रम केवल बाहरी नहीं, मानसिक भी है। व्यक्ति अपने ही बनाए विचार-घेरों में कैद हो जाता है। वही सुनना और देखना चाहता है जो उसके विश्वासों को पुष्ट करे। असहमति अब संवाद नहीं, टकराव बनती जा रही है। नतीजतन समाज ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रहा है, जहां सहमति और सह-अस्तित्व की जगह कट्टरता लेती जा रही है।

ये भी पढ़े – बिहार में रिश्वतखोरी पर वार, 20 लाख से ज्यादा कैश के साथ अधिकारी गिरफ्तार

तकनीक ने हमें जोड़ने का वादा किया था, लेकिन कई बार वही विभाजन का माध्यम बन रही है। फर्जी खबरें, आधी-अधूरी जानकारी और वायरल संस्कृति ने विवेक को चुनौती दी है। सवाल यह नहीं कि सूचना कितनी है, सवाल यह है कि क्या हम सच पहचानने की क्षमता खोते जा रहे हैं?
इस दौर में सबसे बड़ी जरूरत जागरूकता और आत्मचिंतन की है। हर नागरिक को तय करना होगा कि वह भ्रम की रेखा के इस पार खड़ा रहेगा या सत्य की ओर कदम बढ़ाएगा। सत्य सरल नहीं होता, पर स्थायी होता है। भ्रम आकर्षक होता है, पर अस्थायी।

आज आवश्यकता है कि खबर और हकीकत के बीच फर्क करना सीखा जाए। भावनाओं के बजाय तथ्यों को प्राथमिकता दी जाए। क्योंकि यदि भ्रम की यह रेखा और गहरी होती गई, तो समाज का संतुलन भी डगमगाने लगेगा।
अंततः वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती सूचना नहीं, विवेक है। विवेक जागृत रहेगा तो कोई भ्रम हमें स्थायी रूप से बांध नहीं सकेगा।

Read this: https://ce123steelsurvey.blogspot.com/2025/12/?m=1#google_vignette

Karan Pandey

Recent Posts

प्रशासकों का कार्यकाल छह माह बढ़ाने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए…

3 hours ago

दुर्गा प्रतिमा लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली से बाइक की भिड़ंत, युवक गंभीर

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। नवाबगंज थाना क्षेत्र के बाबागंज-मल्हीपुर मार्ग पर सतीजोर गांव के पास…

4 hours ago

रामलीला मेले की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने की मांग, एसडीएम को सौंपा कार्यक्रमों का ब्योरा

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। मिहींपुरवा रामलीला मेला मैदान में आयोजित होने वाले धार्मिक एवं सांस्कृतिक…

4 hours ago

थाना समाधान दिवस में एसडीएम ने सुनीं फरियादियों की समस्याएं, त्वरित निस्तारण के निर्देश

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। मोतीपुर थाने में शनिवार को उपजिलाधिकारी मोनालिसा जौहरी की अध्यक्षता में…

4 hours ago

कैरियर काउंसिलिंग से छात्राओं को मिलेगी सही दिशा, रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकरण की अपील

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। सेवा संकल्प अभियान के तहत राजकीय आश्रम पद्धति बालिका इंटर कॉलेज…

4 hours ago