कलेक्ट्रेट का कायाकल्प डीएम के नवाचारों से सिर्फ सूरत ही नहीं सीरत भी बदल रही

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
कलेक्ट्रेट का स्वरूप इन दिनों एक कुशल प्रशासक की दूरदर्शी सोच का शानदार उदाहरण पेश कर रहा है। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के पदभार ग्रहण करने के बाद से न केवल पूरे जनपद में, बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर में भी ऐसे अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जो हर किसी का दिल खुश कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों की नीरस छवि को पीछे छोड़ते हुए शाहजहांपुर कलेक्ट्रेट अब सुविधा, सुव्यवस्था और सुंदरता के एक नए प्रतिमान के रूप में उभर रहा है।इस बदलाव की सुखद बानगी बीते 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से पूर्व देखने को मिली, जब कलेक्ट्रेट का पूरा भवन ‘फसाड लाइटिंग’ के जरिए तिरंगे की शानदार रोशनी में नहा उठा। शहीदों की इस पावन नगरी के गौरव को और गहराई से उकेरते हुए कलेक्ट्रेट स्थित मुख्य सभागार का भी भव्य रूप से नवीनीकरण कराया गया है। अब इस सभागार को महान क्रांतिकारी अमर शहीद राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के सम्मान में ‘बिस्मिल सभागार’ नाम दिया गया है, जो यहां आने वाले हर शख्स के भीतर देशभक्ति की भावना और गर्व का संचार करता है।
सुंदरता और देशभक्ति के साथ-साथ आम जनता की सहूलियत का भी यहां पूरी संवेदनशीलता से ख्याल रखा जा रहा है। अक्सर दूर-दराज के गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर ‘जनसुनवाई’ में पहुंचते हैं। उन्हें मौसम की मार न सहनी पड़े और उनका इंतजार सुविधाजनक हो, इसके लिए कलेक्ट्रेट में आम लोगों के लिए एक विशेष वातानुकूलित (एसी) पुस्तकालय का निर्माण कराया गया है। यह एक ऐसा नवाचार है जहां लोग सुकून से बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर सकते हैं और किताबें पढ़कर अपना समय सार्थक कर सकते हैं।
कलेक्ट्रेट की व्यवस्था में एक और बड़ा और साफ दिखने वाला सुधार यातायात और पार्किंग को लेकर हुआ है।
पहले जहां अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन परिसर में कहीं भी, बेतरतीब ढंग से खड़े हो जाते थे, वहीं अब अनुशासन का नया स्वरूप देखने को मिल रहा है। अब व्यवस्थित तरीके से निशान बना दिए गए हैं कि किस अधिकारी की गाड़ी कहां खड़ी होगी, जिससे परिसर बेहद खुला और सुव्यवस्थित नजर आता है।इस पूरे कायाकल्प में चार चांद लगा रही हैं कलेक्ट्रेट की दीवारों पर उकेरी जा रही मनमोहक और सुंदर चित्रकारियां। ये कलाकृतियां परिसर को एक नई जीवंतता प्रदान कर रही हैं।जिलाधिकारी के इन प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि सकारात्मक इच्छाशक्ति से एक सरकारी परिसर को न सिर्फ अनुशासित और जन-सुविधाजनक बनाया जा सकता है, बल्कि उसे इतना आकर्षक रूप भी दिया जा सकता है कि वहां आने वाले हर व्यक्ति का मन प्रफुल्लित हो उठे।

rkpnews@somnath

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