8 माह से मानदेय बकाया: 12 ब्लॉकों में मनरेगा कर्मियों की कलमबंद हड़ताल, विकास कार्य ठप

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में मनरेगा कर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। 8 माह से लंबित मानदेय, ईपीएफ कटौती की राशि जमा न होने और अन्य समस्याओं के विरोध में जिले के सभी 12 विकास खंडों में ग्राम रोजगार सेवकों सहित मनरेगा कर्मियों ने शुक्रवार से कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते मनरेगा से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने बताया कि पिछले 8 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। अप्रैल माह में बच्चों के स्कूल में दाखिले तक प्रभावित हो रहे हैं।

जिले के सदर, परतावल, घुघली, पनियरा, फरेंदा, निचलौल, धानी, बृजमनगंज और मिठौरा समेत सभी ब्लॉकों के मनरेगा कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारियों ने संबंधित खंड विकास अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्य बहिष्कार की सूचना दे दी है।

संघ के जिला महासचिव इंद्रमणि विश्वकर्मा ने कहा कि बीते 20 वर्षों से कर्मचारी मनरेगा के साथ-साथ जीरो पॉवर्टी सर्वे, एसआईआर सर्वे, क्राफ्ट सर्वे, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना में पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है।

घुघली ब्लॉक अध्यक्ष बंधु मद्धेशिया ने चेतावनी दी कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान और ईपीएफ की राशि खातों में जमा नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं निचलौल ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम कन्नौजिया ने प्रशासन पर कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।

परतावल ब्लॉक में अध्यक्ष अमित पटेल के नेतृत्व में प्रभारी बीडीओ श्याम सुंदर तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया। इसी प्रकार अन्य सभी ब्लॉकों में भी अधिकारियों को सूचना देकर काम बंद कर दिया गया है।

हड़ताल का सीधा असर मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों पर पड़ा है। मजदूरों को काम आवंटन, मस्टर रोल जारी करना, भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्यों की निगरानी पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य ठप हो गए हैं।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है और कर्मचारियों की मांगों पर कब तक ठोस निर्णय लिया जाता है। फिलहाल, आंदोलन जारी रहने के संकेत हैं।

Karan Pandey

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