मनरेगा के नाम परिवर्तन पर कांग्रेस का तीखा विरोध, आलोक दूबे बोले– गरीबों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
रांची (राष्ट्र की परम्परा)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में प्रस्तावित बदलाव को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर VG RAM G इसलिए किया है क्योंकि वह महात्मा गांधी और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से सहमत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी किसी भी सूरत में गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों के अधिकारों पर कुठाराघात स्वीकार नहीं करेगी।
आलोक दूबे ने कहा कि असली सवाल नाम का नहीं, बल्कि यह है कि क्या इस कानून के जरिए जरूरतमंदों को उनका वैधानिक अधिकार मिल रहा है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए प्रस्तावित बिल में कई ऐसी खामियां हैं, जो मनरेगा की मूल आत्मा को कमजोर करती हैं। भुगतान में लगातार देरी, राज्यों के अधिकारों में कटौती, काम और अवकाश का निर्णय दिल्ली से होना, तथा 125 दिन रोजगार की घोषणा केवल कागजी साबित हो रही है।
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उन्होंने कहा कि आज भी देश के लाखों मजदूरों को 100 दिन का रोजगार तक नहीं मिल पा रहा है। झारखंड जैसे आर्थिक रूप से कमजोर राज्य पर 40 प्रतिशत खर्च का बोझ डालना अन्यायपूर्ण है। पहले जहां बरसात के मौसम में भी मजदूरों को काम मिलता था, वहीं अब केंद्र सरकार उस अवधि में काम न देने की नीति अपना रही है।
5 जनवरी को राज्यव्यापी आंदोलन
आलोक दूबे ने बताया कि 5 जनवरी को पूरे देश सहित झारखंड में कांग्रेस पार्टी “मनरेगा बचाओ आंदोलन” के तहत सड़कों पर उतरेगी। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू विशेष रूप से संकल्प सभा और पदयात्रा में शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता बापू वाटिका से लोक भवन तक मार्च करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन गरीबों, किसानों और मजदूरों के हक की निर्णायक लड़ाई है और कांग्रेस पार्टी जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देगी।
