आईजीआरएस शिकायतों पर भी सवालों के घेरे में प्रशासन

नाथ नगर में सार्वजनिक सड़क पर बढ़ता अवैध कब्जा

देवरिया के नाथ नगर में सड़क अतिक्रमण पर प्रशासन मौन, जनता परेशान


(राष्ट्र की परम्परा डेस्क | देवरिया)

देवरिया जनपद के नाथ नगर क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क पर हो रहे अवैध अतिक्रमण ने अब गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का रूप ले लिया है। यह मामला केवल एक सड़क कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नगर पालिका, विनियमित क्षेत्र कार्यालय और उपजिलाधिकारी स्तर की निष्क्रियता भी उजागर हो रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायतों और निरीक्षणों के बावजूद ठोस कार्रवाई न होना, पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है।

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कुछ सप्ताह पहले जब यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया, तब “योगी जी के बुलडोजर” की चर्चाओं के बीच बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। उस दौरान निर्माण कार्य को रुकवा दिया गया, जिससे लोगों को उम्मीद जगी कि अवैध कब्जा हटेगा। लेकिन यह कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रह गई। मौके पर मौजूद अधिकारियों और अतिक्रमणकर्ता के बीच कथित इशारों-इशारों में बातचीत हुई और कुछ दिनों की मोहलत देकर पूरी टीम वापस लौट गई।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने सख्ती दिखाने के बजाय दबाव और डर की रणनीति अपनाई। इसका नतीजा यह हुआ कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी न केवल निर्माण दोबारा शुरू हुआ, बल्कि अतिक्रमण और तेजी से बढ़ गया। अब स्थिति यह है कि सड़क पर कब्जा करने वाले व्यक्ति ने वहां पेड़ लगा दिए हैं, तारबंदी कर दी है और रास्ते को पूरी तरह घेरने की कोशिश जारी है।
नाथ नगर के निवासियों के अनुसार, इस सड़क से रोज़ाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। अतिक्रमण के कारण आवागमन बाधित हो रहा है और आपात स्थिति में गंभीर दुर्घटना या विवाद की आशंका बनी हुई है। मोहल्लेवासी लगातार नगर पालिका, विनियमित क्षेत्र कार्यालय और तहसील स्तर पर शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन हर विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है।

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नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का कहना है कि यह “सरकारी प्रक्रिया” का विषय है, इसलिए समय लग रहा है। वहीं विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता इसे “एकमात्र मामला नहीं” बताकर जवाबदेही से बचते दिख रहे हैं। सर्वे से जुड़े अधिकारी “चैनल सिस्टम” का हवाला देकर कार्रवाई टाल रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पीड़ित नागरिकों ने सरकार द्वारा प्रचारित आई.जी.आर.एस. (IGRS) पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां भी स्थानीय अधिकारियों ने कथित तौर पर गलत और भ्रामक रिपोर्ट भेज दी। इससे न केवल पीड़ितों की समस्या बढ़ी, बल्कि सरकार तक गलत जानकारी पहुंचने का आरोप भी लग रहा है।
अब सवाल यह है कि देवरिया नाथ नगर सड़क अतिक्रमण जैसे गंभीर मामले में प्रशासन कब जागेगा? क्या सार्वजनिक रास्ते पर हो रहे नए निर्माण और कब्जे पर समय रहते कार्रवाई होगी, या फिर जनता को यूं ही परेशान होना पड़ेगा? यह प्रकरण प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन के दावों की भी कड़ी परीक्षा बन चुका है।

Editor CP pandey

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