PWD देवरिया में निविदा प्रक्रिया पर सवाल, बिना शासनादेश नई शर्त से ठेकेदारों को किया गया बाहर
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।लोक निर्माण विभाग (PWD) के देवरिया वृत्त में पांटून पीपा पुल के खोलने–बांधने से जुड़ी निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभाग के गठन के बाद से यह कार्य मार्ग श्रेणी के अनुभवी ठेकेदारों के माध्यम से शासनादेश के अनुरूप कराया जाता रहा है, लेकिन वर्तमान अधीक्षण अभियंता के कार्यकाल में इस परंपरागत व्यवस्था में कथित रूप से मनमाने बदलाव किए जाने का आरोप है।
आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट शासनादेश या आधिकारिक परिपत्र के पांटून पीपा पुल की निविदा में “सेतु पंजीकरण” (Bridge Registration) को अनिवार्य कर दिया गया। इस नई शर्त के चलते कई योग्य और अनुभवी ठेकेदार निविदा प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि निविदा में अचानक शर्तें जोड़ना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ठेकेदारों की आपत्ति, फिर भी नहीं सुनी गई बात
प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले ठेकेदारों, जिनमें गिरिजेश कुमार मिश्रा सहित अन्य शामिल हैं, ने इस नई शर्त पर आपत्ति जताते हुए मुख्य अभियंता, गोरखपुर क्षेत्र को लिखित रूप से अवगत कराया। ठेकेदारों का कहना है कि शासनादेशों का पालन सुनिश्चित कराना मुख्य अभियंता की जिम्मेदारी है, इसके बावजूद प्रकाशित निविदाओं में वही विवादित शर्त लागू रही।
आरोप यह भी है कि 3 जनवरी 2026 को अवकाश के दिन निविदा खोलकर कुछ ठेकेदारों को अपात्र घोषित कर दिया गया, जिससे संदेह और गहराता है। ठेकेदारों का दावा है कि प्रमुख अभियंता स्तर से भी इस शर्त को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे, फिर भी उनका पालन नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री के निकटवर्ती जिले में नियमों की अनदेखी?
देवरिया जिला मुख्यमंत्री के गृह जनपद के निकट है। ऐसे में नियमों और परिपत्रों की कथित अनदेखी को लेकर शासन की छवि पर भी असर पड़ने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि मुख्यमंत्री के समीपवर्ती जिलों में ही इस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं, तो अन्य जनपदों की स्थिति क्या होगी।
निविदा निरस्त कर पुनः प्रकाशन की मांग
ठेकेदार गिरिजेश कुमार मिश्रा द्वारा मुख्य अभियंता गोरखपुर क्षेत्र को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि विशेष शर्त लगाकर जारी की गई निविदा को निरस्त कर शासनादेश के अनुरूप पुनः निविदा प्रकाशित की जाए, ताकि सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर मिल सके और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोक निर्माण विभाग देवरिया वृत्त में उठे इन आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या मामला पूर्व की तरह जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाता है। जब इस संदर्भ में अधीक्षण अभियंता से बात करने की कोशिश की गई तो बात नहीं हो सकी।
