Thursday, February 26, 2026
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वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार: पुलिस चौकी के बावजूद 20 घंटे तक नहीं मिला सुराग, जिम्मेदारों पर सवाल

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होने की घटना ने जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तरकुलवा थाने की पुलिस द्वारा बरामद की गई किशोरी को सुरक्षित रखने के लिए वन स्टॉप सेंटर भेजा गया था, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सेंटर परिसर में पुलिस चौकी होने के बावजूद किशोरी फरार हो गई। 20 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लग सका है।
इस पूरे मामले में पुलिस और सेंटर कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, तरकुलवा थाना क्षेत्र से एक किशोरी को पुलिस ने बरामद किया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे देवरिया वन स्टॉप सेंटर में अस्थायी संरक्षण के लिए रखा गया। वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना होता है।
लेकिन सुरक्षा के दावों के बीच किशोरी के फरार होने की घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बताया जा रहा है कि किशोरी देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में सेंटर से बाहर निकल गई। सुबह जब उसकी मौजूदगी की जांच की गई तो वह नहीं मिली।
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
पुलिस चौकी के बावजूद कैसे हुई चूक?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस परिसर में पुलिस चौकी मौजूद है, वहां से किशोरी कैसे निकल गई? क्या सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर नहीं थे? क्या सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे?
क्या रजिस्टर में निगरानी की एंट्री की गई थी?इन सभी सवालों का जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। सूत्रों के मुताबिक, रातभर पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, आसपास के इलाकों में तलाश की, लेकिन 20 घंटे बाद भी कोई सफलता नहीं मिली।
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होने की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

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प्रशासन की चुप्पी और कार्रवाई का अभाव
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की बैठक तो हुई, लेकिन अब तक किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ निलंबन या विभागीय जांच की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि: वन स्टॉप सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच हो। सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए।
ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
वन स्टॉप सेंटर की भूमिका और जिम्मेदारी
वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को हिंसा, उत्पीड़न या संकट की स्थिति में तत्काल सहायता, कानूनी सलाह, काउंसलिंग और अस्थायी आश्रय प्रदान करना है। ऐसे में यदि इसी सुरक्षित माने जाने वाले स्थान से किशोरी फरार हो जाए, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
सेंटर में 24 घंटे निगरानी व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। प्रवेश और निकास द्वार पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए। पुलिस और सेंटर प्रशासन के बीच समन्वय मजबूत होना चाहिए।
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होने की घटना इन व्यवस्थाओं की वास्तविकता पर सवाल खड़ा करती है।

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पुलिस की तलाश जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किशोरी की तलाश के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और आसपास के जनपदों में भी अलर्ट जारी किया गया है। मोबाइल लोकेशन और परिचितों से पूछताछ की जा रही है।
हालांकि, घटना के 20 घंटे बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिलना चिंता का विषय बना हुआ है।
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार मामले में पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे बरामद कर लिया जाएगा, लेकिन अब तक नतीजे सामने नहीं आए हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षित केंद्रों की यह स्थिति है, तो आम लोगों की सुरक्षा का क्या होगा?
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:
पूरे जिले के सभी आश्रय गृहों की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए।
लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होना सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
उठते प्रमुख सवाल
सेंटर परिसर में पुलिस चौकी होने के बावजूद सुरक्षा में चूक कैसे हुई?
क्या सीसीटीवी कैमरे चालू थे?
ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका क्या रही?
जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार प्रकरण में इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं।
देवरिया वन स्टॉप सेंटर से किशोरी फरार होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। 20 घंटे बाद भी किशोरी का पता नहीं चलना प्रशासन की गंभीर विफलता को दर्शाता है। पुलिस और सेंटर कर्मचारियों की भूमिका पर उठ रहे सवालों के बीच अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कब तक ठोस कार्रवाई करता है और किशोरी को सुरक्षित बरामद कर पाता है या नहीं।
यह घटना न केवल देवरिया, बल्कि पूरे प्रदेश में वन स्टॉप सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रही है।

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