रास्ता भी मिल गया
हे कृष्ण गोविंद, मेरे हरे मुरारे,हे नाथ नारायण, हे वासुदेवाय,हे हरये गोपालाय, हे वंशीधराय,प्रणतक्लेशनाशाय, राधेनाथाय। आपको सिरपर मुकुट पहने हुये,हाथों में गदा और चक्र लिये हुये,वसुदेवपुत्र, चतुर्भुज स्वरूप में ही,श्रीकृष्ण…
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हे कृष्ण गोविंद, मेरे हरे मुरारे,हे नाथ नारायण, हे वासुदेवाय,हे हरये गोपालाय, हे वंशीधराय,प्रणतक्लेशनाशाय, राधेनाथाय। आपको सिरपर मुकुट पहने हुये,हाथों में गदा और चक्र लिये हुये,वसुदेवपुत्र, चतुर्भुज स्वरूप में ही,श्रीकृष्ण…