प्रेम का रंग चढ़ता चला गया,यूँ लगा कि दुनिया हमारी है,त्याग का यत्न जब सीखा तोऐसा लगा कि जन्नत हमारी…
भारतीय ऋतुओं में वसंत ऋतु केवल मौसम नहीं, बल्कि जीवन में नवचेतना का उत्सव है। फागुन–चैत के आते ही खेत-खलिहान,…
— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हिंदी साहित्य के निर्भीक और जनपक्षधर कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि पर साहित्य जगत…