कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि: कविता के जरिए मनुष्यता की अनवरत लड़ाई

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)हिंदी साहित्य के निर्भीक और जनपक्षधर कवि ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ की प्रथम पुण्यतिथि पर साहित्य जगत उन्हें गहरी संवेदना और सम्मान के साथ याद कर रहा है। पाषाण केवल कवि नहीं थे, बल्कि कविता को संघर्ष, विवेक और मनुष्यता का औजार मानने वाले विचारक थे। उनकी रचनाओं में सत्ता, दमन, पाखंड और अन्याय के विरुद्ध तीखी चेतना मिलती है, वहीं प्रेम, प्रकृति और करुणा का कोमल स्पर्श भी समान रूप से उपस्थित रहता है।
पाषाण की कविता किसी एक खांचे में बंधी नहीं थी। वे कबीर की निर्भीकता, निराला की विद्रोही चेतना, मुक्तिबोध की आत्मसंघर्षशीलता और नागार्जुन की जनसरोकारिता को अपने समय की भाषा में साधते थे। उनके लिए साहित्य का लक्ष्य स्पष्ट था—मनुष्य को मनुष्य बने रहने की प्रेरणा देना। यही कारण है कि उनकी कविताएं सेंसर, दमन और सत्ता की बंदिशों से परे जाकर पाठक के विवेक को जगाती हैं।
आपातकाल, जनांदोलन, नंदीग्राम जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों से उनका जीवन और लेखन गहरे रूप में जुड़ा रहा। उन्होंने कविता को करुण-विलाप नहीं, बल्कि संघर्ष की कथा बनाया। सोशल मीडिया जैसे आधुनिक मंचों पर भी वे अंतिम समय तक सक्रिय रहे और युवा रचनाकारों को निर्भीक लेखन की प्रेरणा देते रहे।

ये भी पढ़ें – मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अनिवार्य, नहीं भरा तो फरवरी में नहीं मिलेगा वेतन

देवरिया जनपद की साहित्यिक भूमि से निकले पाषाण की कृतियां—मैं गुरिल्ला हूँ, बन्दूक और नारे, वाल्मीकि की चिंता, चौराहे पर कृष्ण—आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी कविता याद दिलाती है कि असहमति, संवेदना और सत्य ही साहित्य की असली पहचान है। प्रथम पुण्यतिथि पर यही सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है कि उनकी कविता को पढ़ा जाए, समझा जाए और जिया जाए।

Editor CP pandey

Recent Posts

प्याज-चीनी की महंगाई से बढ़ी रसोई की चिंता, क्या बफर स्टॉक बनेगा किसान-उपभोक्ता संतुलन का समाधान?

रसोई में महंगाई का तड़का: प्याज 70 रुपये पार, चीनी की तेजी ने बढ़ाई चिंता;…

12 hours ago

औद्योगिक भ्रमण में विद्यार्थियों ने समझी उद्योग जगत की कार्यप्रणाली

बिछुआ (राष्ट्र की परम्परा)। कक्षा में पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक…

15 hours ago

राखी का संदेश

✍️ विजय गुंजन स्नेह है, अनुराग है, पवित्रता का बंधन है,ममता भरे एक धागे का…

16 hours ago

रक्षा बंधन: रिश्तों की डोर से राष्ट्र की परम्परा तक

नवनीत मिश्र रक्षा बंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के…

1 day ago

रॉयल्टी के छह गुना दंड से परेशान पीडब्ल्यूडी ठेकेदार, कार्य बहिष्कार की तैयारी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश के ठेकेदार रॉयल्टी से जुड़े मामलों…

1 day ago

भाई-बहन का स्नेहाकाश

✍️ संजय एम. तराणेकर कलाई पर बंधता धागा है,पर बंधता है उससे विश्वास,बहन की आँखों…

1 day ago