उम्मीद

राख से उठती लौ: आँसूओं से जन्मी हिम्मत की कहानी

उन दीवारों से पूछो वो 'रातें' कैसी थीं,जब 'रोटी' भी छुप-छुप के खाती थी।उनके आँसू भी 'आवाज़' न करें कहीं,इस…

4 weeks ago

🌅 “जब तक हम हैं, उम्मीद ज़िंदा है” — बुरे दौर से उबरने का सबसे बड़ा सहारा: हम खुद

लेखक - दिलीप पाण्डेय ज़िंदगी में ऐसे पल आ ही जाते हैं जब लगता है कि सब कुछ थम गया…

6 months ago