उन दीवारों से पूछो वो 'रातें' कैसी थीं,जब 'रोटी' भी छुप-छुप के खाती थी।उनके आँसू भी 'आवाज़' न करें कहीं,इस…
लेखक - दिलीप पाण्डेय ज़िंदगी में ऐसे पल आ ही जाते हैं जब लगता है कि सब कुछ थम गया…