लेखक – दिलीप पाण्डेय
ज़िंदगी में ऐसे पल आ ही जाते हैं जब लगता है कि सब कुछ थम गया है। हालात उम्मीद से बिल्कुल उलट हो जाते हैं और मन स्वीकार नहीं कर पाता कि इतना अंधेरा भी कभी हो सकता है। ऐसे दौर में एक ही सवाल उठता है — क्या कल बेहतर होगा?
और इसका सबसे सटीक उत्तर है — हाँ, क्योंकि ‘उम्मीद हमारा सबसे बड़ा सहारा’ है।
ये भी पढ़ें –स्वास्थ्य, करियर, राजनीति, प्रशासन और प्रेम का पूर्ण विश्लेषण
कठिन समय हमेशा इंसान को तोड़ता नहीं, बल्कि उसे भीतर से मजबूत बनाता है। जब बाहरी दुनिया से समर्थन कम हो जाए, तो अंत में सिर्फ हम ही अपने सबसे बड़े साथी बनकर खड़े होते हैं। यही कारण है कि कहा जाता है — “हमारी आखिरी उम्मीद हम खुद हैं, जब तक हम हैं।”
उम्मीद हमारा सबसे बड़ा सहारा: मुश्किल दौर की सबसे बड़ी सीख आज जब लोग तनाव, बेरोजगारी, आर्थिक चुनौतियों और मानसिक बोझ से गुजर रहे हैं, तब उम्मीद का होना केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक भी है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि उम्मीद का स्तर जितना ऊँचा होता है, व्यक्ति की समस्या-समाधान क्षमता उतनी ही बेहतर होती है।
ये भी पढ़ें – राष्ट्र के महान योगदानकर्ताओं की अनमोल विरासत
उम्मीद क्यों ज़रूरी है?
विद्यार्थी हित में नई शैक्षणिक एवं अधोसंरचनात्मक योजनाओं की घोषणा लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब…
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l विगत सप्ताह विकास कार्यो के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम मे देवरिया पधारे…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विश्वविद्यालय अनुदान…
बेहन, रोपाई और मजदूरों की समस्या से छुटकारा, आधुनिक कृषि तकनीक की ओर बढ़ रहे…
मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में…
नारायणी शाखा नहर पर बने पुल में गहरे गड्ढों से बढ़ा खतरा, मरम्मत न होने…