बंद चीनी मिलों से खत्म हो गई किसानों के गन्ने का मिठास

किसानों के बकाये व मिल प्रबंधन की कमी से बंद हुआ चीनी मिल

महराजगंज जनपद मे चार चीनी मिलों मे से तीन चीनी मिल हुए बंद

महराजगंज ( राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जनपद मे कुल चार चीनी मिलों की स्थापना हुई थी जिसमें फरेन्दा आनन्दनगर मे गणेश शुगर मिल ,घुघुली मे पंजाब शुगर मिल निचलौल गडौरा मे जेएचवी शुगर कॉर्पोरेशन लिमिटेड व सिसवा मे आईपीएल शुगर लिमिटेड की स्थापना हुई थी जो अब बंद चीनी मिलो की वजह से किसानों की गन्ने की मिठास खत्म हो चुकी है जिससे किसानों के आय मे पहले की अपेक्षा बहुत ज्यादा गिरावट आयी है लेकिन आज तक इन चीनी मिलो को पुनः संचालित करने की पहल नही किया गया ।राष्ट्र की परम्परा टीम ने इन चीनी मिलों के विषय में जानकारी हासिल किया जो इस प्रकार है-
15 हजार क्विंटल प्रतिदिन पेराई क्षमता वाली गणेश शुगर मिल की स्थापना राजस्थान के निवासी सेठ आनंदराम जैपुरिया ने क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने एवं शिक्षा की ज्योति जलाने के क्रम में किया था। उसी समय एक इंटर कालेज एक जूनियर हाईस्कूल की स्थापना भी की गई ।1988 तक यह मिल उद्योगपति के निजी स्वामित्व में रही। तदोपरांत सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कंपनी का 98 प्रतिशत भारत सरकार के उपक्रम एनटीसी के अधीन हो जाने के बाद मिल सरकारी कंपनी के रूप में स्थापित हो गई। फरवरी 1994 में बैंक गारंटी न देने के कारण उत्पादन बंद हो गई । मिल बंद होने के पांच वर्ष तक कर्मचारियों को वेतन मिलता रहा। उसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश से बंद होने के बाद मिल कर्मियों का वेतन भी बंद हो गया।दिसंबर 1917 से हाईकोर्ट के निर्देशन में राष्ट्रीय वस्त्र निगम के नाम से दर्ज सभी संपत्तियों की निगरानी शासकीय समापक (आफिशियल लिक्विडेटर) द्वारा की जा रही है।यह है शुगर मिल की अचल संपत्ति में फरेंदा में स्थित मिल परिसर 33 एकड़,चेहरी में 624 एकड़ ,बागापार में 105 एकड़ भूमि,सिधवारी फरेंदा में डेढ़ एकड़ भूमि,खलीलाबाद (संतकबीरनगर) में 16 एकड़ भूमि, कम्हरिया खुर्द व मथुरानगर में डेढ़ एकड़ स्थित है |
घुघली चीनी मिल की स्थापना पंजाब प्रांत के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में किया था। इसे पंजाब शुगर मिल के नाम से जाना जाता था। मिल की स्थापना के बाद घुघली राजनैतिक, व्यापारिक, कृषि क्षेत्र सेहतमंद हुआ। मिल की वजह से इस कस्बे को एक पहचान मिली। मजदूरों को रोजगार मिला। साथ ही किसानों को गन्ने की खेती करने में रूचि हुई। लंबे अरसे तक यह चीनी मिल किसानों एवं क्षेत्रवासियों को फायदा पहुंचाता रहा। लेकिन वक्त बितने के साथ ही वर्ष 1997-98 में फायदे के बावजूद मिल बंद करने की घोषणा कर दी गई।क्षेत्र के तत्कालीन सांसद और वर्तमान मे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर मिल चलाने की मंजूरी तो मिल गई परंतु एक सीजन चलने के बाद मिल फिर से 31 अक्टूबर 1999 को बंद हो गई। बंद होने के बाद 2012 को मायावती सरकार मे 3075 करोड़ रुपये मे जिरकाम शुगर सालूसन के हाथो बच दिया गया जिससे 928 मिल कर्मचारी पर आर्थिक संकट के बादल छा गये।
ओसवाल फूड्स लिमिटेड, एक पंजीकृत कंपनी, के पास ग्राम गडौरा जमुई कलां, तहसील निचलौल, जिला महराजगंज, उत्तर प्रदेश में वैक्यूम पैन शुगर मिल की स्थापना और संचालन के लिए 26/30 जुलाई, 1996 का लाइसेंस था। ओसवाल फूड्स लिमिटेड ने ग्राम गडौरा, भगवानपुर और जमुई कलां में 63.80 एकड़ फ्री होल्ड भूमि खरीदी और भूमि विकसित की। ओएफएल ने मेसर्स के साथ एक समझौता किया। भवन, फैक्ट्री शेड और गोदामों के निर्माण के उद्देश्य से आरएस बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, लुधियाना। ओएफएल ने टर्न के आधार पर उक्त चीनी कारखाने की स्थापना के लिए आवश्यक संपूर्ण मशीनरी और उपकरणों की आपूर्ति के लिए डब्ल्यूआईएल, पुणे के साथ एक समझौता भी किया। आपूर्तिकर्ता यानी, मैसर्स वाल चंद। नगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड (बाद में डब्ल्यूआईएल के रूप में संदर्भित) रुपये की मशीनरी लेकर आया। 581.12 लाख. ओएफएल ने रुपये का भुगतान किया था। WIL को 1168.44 लाख रु. ओएफएल ने स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से मशीनरी भी खरीदी और फैक्ट्री चलाने के लिए बॉयलर और अन्य सहायक उपकरण की आपूर्ति के लिए अन्य ठेकेदारों के साथ अनुबंध किया। निदेशक मंडल ने 21 अक्टूबर, 1997 को अपनी बैठक में कंपनी की चीनी इकाई की संपूर्ण चल और अचल संपत्तियों का निपटारा करने का निर्णय लिया, जिसमें इसके चल संयंत्र और मशीनरी के पुर्जे, उपकरण और सहायक उपकरण वर्तमान और भविष्य की अन्य चल संपत्तियां शामिल थीं। निदेशक मंडल ने 21 जनवरी, 1998 को अपनी बैठक में चीनी इकाई का निपटान ‘जहाँ है जैसा है’ के आधार पर करने का निर्णय लिया। ओएफएल ने जेएचवी शुगर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ 14 मई, 1998 को एक समझौता किया। एक पंजीकृत कंपनी. जेएचवी शुगर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को चीनी प्रभाग हस्तांतरित करने हेतु समझौते में भूमि के हस्तांतरण, अधूरे भवन ढांचे, मशीनरी नींव सहित निर्माण सामग्री, स्टील संरचना और साइट पर पड़ी मशीनरी और लाइसेंस भी शामिल था। दिनांक 14 मई, 1998 के समझौते के अनुसरण में ओएफएल द्वारा 24 मार्च, 1999 को एक विक्रय विलेख निष्पादित किया गया, जो जेएचवी शुगर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम दर्ज हुआ और कुछ दिनो तक चलने के बाद किसानो की भुगतान न होने के कारण बंद हो गया जो आज भी बंद पड़ा हुआ है |
जिले की एकलौता चीनी बना आईपीएल चीनी मिल सिसवा महराजगंज में गन्ना किसानों के लिए एकलौता चीनी मिल सिसवा चालू है जो कुछ राहत देता है नही तो मिठे गन्ने के रस के अलावा जनपद वासियों को मिठास का स्वाद खत्म हो जाता। जिले के गन्ना किसानो की प्रक्रिया–

सपा के संस्थापक जिलाध्यक्ष जगदंबा मिश्रा ने कहा कि फरेन्दा चीनी मिल बन्द होने से फरेन्दा विधानसभा व नौतनवा विधानसभा क्षेत्र के किसानो को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है जो अब इस क्षेत्र से गन्ने की बुआई खत्म हो गई है ।

सदर ब्लाक के ग्राम सभा कटहरा निवासी किसान भागीरथ यादव ने कहा कि मिल न चलने के वजह से गन्ना नहीं लगा रहे हैं इसलिए क्षेत्र के लोग गन्ने कि खेती नहीं करते है जो थोड़ा बहुत करते है वह ग्राम सभा के खडेसर पर कम दामों मे बेच देते है ।

निचलौल ब्लाक के सोहगी बरवा निवासी प्रभु नाथ ने कहा कि सोहगीबरवा, भोथहा ,शिकार मे गन्ने की खेती सर्वाधिक होती है जो गडौरा चीनी मिल बंद होने व बकाया रुपयो के कारण गन्ने की खेती करना धीरे धीरे बंद कर रहा है बाकि जो करते है वह कुशीनगर व बिहार के मिलों पर दूसरे व्यक्ति के हाथो बेच देता है ।

घुघली ब्लाक के अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दू युवा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बल्लो धाम शक्तिपीठ के पीठाधिश्वर व लोक सभा प्रत्याशी विजय कुमार मिश्र ने कहा कि यह जनपद कभी मिनी पंजाब कहलाती थी लेकिन उपेक्षा का शिकार होने से जनपद आज पहचान का मोहताज हो गया है | ऐसे मे किसानो की आय बढने के बजाय आय कम हो गया है ।

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