SWAYAM से डीडीयू के स्नातक छात्र पढ़ेंगे साइबर सिक्योरिटी, वैदिक ज्ञान और पर्यावरण

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम (एईसी) का अध्ययन स्वयं प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध सभी महाविद्यालयों के स्नातक चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों पर लागू होगी।
विद्यार्थियों की सुविधा एवं प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने स्वयं प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों में से छह जीवनोपयोगी पाठ्यक्रमों का चयन किया है। प्रत्येक विद्यार्थी को इन छह पाठ्यक्रमों में से एक का चयन कर ऑनलाइन अध्ययन करना अनिवार्य होगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए पंजीकरण जनवरी माह में प्रारंभ होगा।
इन क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सिक्योरिटी, वैदिक सूक्त, पर्यावरणीय मुद्दे, योग, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन और भारतीय अर्थव्यवस्था जैसे समकालीन विषयों का ज्ञान प्राप्त होगा। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल, सामाजिक चेतना और डिजिटल सुरक्षा की समझ विकसित करना है।
स्वयं प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित यह व्यवस्था विद्यार्थियों को विकल्प की स्वतंत्रता प्रदान करती है, जिससे वे अपनी रुचि, क्षमता और भविष्य की योजनाओं के अनुरूप पाठ्यक्रम का चयन कर सकें। ऑनलाइन माध्यम के कारण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान शैक्षणिक अवसर प्राप्त होंगे।
क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रमों में इंटरनेट क्राइम्स एंड साइबर सिक्योरिटी, वैदिक सूक्त निरूपण, एनवायरनमेंटल इश्यूज़, चैलेंजेज़ एंड मैनेजमेंट, योगा एंड पॉजिटिव साइकोलॉजी फॉर मैनेजिंग करियर एंड लाइफ, समतामूलक एवं समावेशी शिक्षा तथा इंडियन इकोनॉमी: सम कंटेम्पररी पर्सपेक्टिव्स शामिल हैं। सभी पाठ्यक्रम 8 सप्ताह की अवधि के 2-क्रेडिट कोर्स हैं और हिंदी व अंग्रेज़ी-दोनों माध्यमों में उपलब्ध हैं।
स्वयं आधारित इन पाठ्यक्रमों में 30 अंकों का इंटरनल असेसमेंट और 70 अंकों की एंड सेमेस्टर परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिसमें न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। एंड सेमेस्टर परीक्षा का आयोजन विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा और सफल विद्यार्थियों के क्रेडिट उनके अकादमिक रिकॉर्ड में जोड़े जाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना और उन्हें जिम्मेदार, जागरूक एवं सक्षम नागरिक बनाना है।

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