नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)शिवसेना नेता तिरुपति नरसिम्हा मुरारी द्वारा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की मान्यता रद्द करने को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि AIMIM एक संप्रदायिक पार्टी है, जो केवल मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए काम करती है और यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।
मुरारी की दलील थी कि संविधान और चुनावी कानूनों के तहत किसी भी राजनीतिक दल को केवल एक समुदाय विशेष के लिए काम करने की अनुमति नहीं है, और AIMIM की नीति और बयानबाजी इससे मेल नहीं खाती।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सुनने से इनकार करते हुए तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा—
“केवल संप्रदाय विशेष के लिए काम करना जितना खतरनाक है, उतनी ही खतरनाक जातिगत राजनीति भी है। देश में कुछ राजनीतिक दल जातियों के आधार पर राजनीति कर रहे हैं, उस पर भी समान दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता किसी एक पार्टी के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए, सभी ऐसे राजनीतिक दलों के खिलाफ याचिका दाखिल करें जो संप्रदाय या जाति आधारित राजनीति करते हैं, तो वह विचार योग्य हो सकती है।
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