Friday, January 16, 2026
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अग्नि-5 का सफल परीक्षण: भारत ने दिखाई सामरिक शक्ति

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत ने अपनी सामरिक सैन्य क्षमताओं का जोरदार प्रदर्शन करते हुए बुधवार को मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस अत्याधुनिक मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने सभी परिचालन एवं तकनीकी मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

मंत्रालय के अनुसार, ‘‘मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-5’ का 20 अगस्त को सफल परीक्षण किया गया। विभिन्न दूरमापी और रडार केंद्रों से इस पूरे परीक्षण पर नजर रखी गई और मिसाइल ने सभी निर्धारित मानकों को पूरा किया।’’

2012 में हुआ था पहला परीक्षण

गौरतलब है कि भारत ने पहली बार अग्नि-5 का परीक्षण 19 अप्रैल 2012 को चांदीपुर से किया था। उस समय इसे हिंद महासागर में एक पूर्व-निर्धारित लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया गया था।

5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता अग्नि-5 मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह मिसाइल 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है और अधिकतम 600 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकती है। यह 1.5 टन तक का परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।

MIRV तकनीक से लैस अग्नि-5 मिसाइल MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस है। इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल कई हथियारों से युक्त होकर अलग-अलग लक्ष्यों पर एक साथ प्रहार कर सकती है। इससे भारत की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम मिसाइल को अचूक सटीकता देने के लिए इसमें RLG-INS (रिंग लेज़र जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) और MINGS (माइक्रो-इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) का प्रयोग किया गया है। ये प्रणाली भारत की अपनी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली NavIC और अमेरिकी GPS से भी समर्थित हैं।

RLG-INS: बाहरी संकेतों पर निर्भर हुए बिना मिसाइल को सही रास्ते पर बनाए रखता है। NavIC: भारत की स्वदेशी उपग्रह प्रणाली, जो वास्तविक समय की स्थिति तय करने में मदद करती है।GPS: अमेरिकी प्रणाली, जो अतिरिक्त सटीकता प्रदान करती है।

तीन-चरणीय ठोस-ईंधन प्रणाली अग्नि-5 मिसाइल तीन-चरणीय ठोस-ईंधन प्रणाली से संचालित होती है और इसे कनस्तर से प्रक्षेपित किया जाता है। इससे मिसाइल को सुरक्षित तरीके से संग्रहीत, आसानी से स्थानांतरित और शीघ्र प्रक्षेपित किया जा सकता है। हाल के वर्षों में इसमें बेहतर एवियोनिक्स, पुनः प्रवेश पर मज़बूत ताप परिरक्षण और उन्नत मार्गदर्शन प्रणालियाँ जोड़ी गई हैं।

भारत की परमाणु रक्षा प्रणाली की रीढ़ विशेषज्ञों के मुताबिक, अग्नि-5 मिसाइल भारत की भूमि-आधारित परमाणु रक्षा प्रणाली की मुख्य ताकत है। यह न केवल भारत की सामरिक शक्ति को मजबूत करती है, बल्कि संभावित खतरों के खिलाफ विश्व मंच पर भारत की स्थिति को भी और सशक्त बनाती है।

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