पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा 2026 की शुरुआत के पहले ही दिन एक बेहद दुखद घटना सामने आई। पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र में परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने के कारण एक छात्रा को परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली। परीक्षा छूटने से आहत होकर छात्रा ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
परीक्षा केंद्र पर देर, टूट गया हौसला
मसौढ़ी के खरजंबा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी कोमल कुमारी निर्धारित समय से देरी से अपने परीक्षा केंद्र पहुंची थीं। नियमों के अनुसार समय सीमा के बाद परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। परीक्षा से वंचित होने की निराशा ने छात्रा को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
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घर लौटने के बाद उठाया खौफनाक कदम
परिजनों के साथ घर लौटने के बाद कोमल कुमारी ने कपड़े बदले और बिना किसी को कुछ बताए घर से निकल गईं। कुछ समय बाद मसौढ़ी थाना क्षेत्र के महाराजचक गांव के पास पटना–गया रेलखंड पर उनका शव रेलवे ट्रैक के समीप मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा। बाद में सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के जरिए परिजनों ने शव की पहचान की।
परिजनों का बयान और पुलिस की कार्रवाई
थानाध्यक्ष विवेक भारती के अनुसार मृतका की मां संगीता देवी ने बताया कि कोमल कुमारी इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा दे रही थीं और धनरूआ के बरनी परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने गई थीं। देर से पहुंचने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिला, जिससे वे गहरे तनाव में चली गईं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026: पहले दिन के आंकड़े
मंगलवार को बिहार भर में 1699 परीक्षा केंद्रों पर 15 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने मैट्रिक की परीक्षा दी। नकल के आरोप में 5 परीक्षार्थियों को परीक्षा से बाहर किया गया, जबकि 9 फर्जी परीक्षार्थियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन की सख्ती के बीच यह घटना छात्रों के मानसिक दबाव को भी उजागर करती है।
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विशेष परीक्षा का मिलेगा मौका
इस दुखद घटना के बीच बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उन छात्रों के लिए राहत भरी घोषणा की है, जिनकी परीक्षा जाम, देरी या अन्य कारणों से छूट गई। बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने स्पष्ट किया कि ऐसे परीक्षार्थियों के लिए अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई की शुरुआत में विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसका परिणाम मई–जून तक घोषित कर दिया जाएगा, ताकि छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
यह घटना परीक्षा के दौरान छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और काउंसलिंग की कमी की ओर भी इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा छूटने या असफलता की स्थिति में छात्रों को भावनात्मक सहारा और सही मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी है।
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 के पहले ही दिन हुई यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। जहां एक ओर प्रशासन परीक्षा की पारदर्शिता और अनुशासन पर जोर दे रहा है, वहीं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और वैकल्पिक अवसरों की जानकारी समय पर पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। बोर्ड द्वारा घोषित विशेष परीक्षा उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनकी परीक्षा किसी कारणवश छूट गई।
