आवारा कुत्तों का आतंक: सुप्रीम कोर्ट के आदेश बेअसर, आमजन भयभीत

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मऊ में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार और रिहायशी गलियों में झुंड के रूप में मौजूद ये कुत्ते आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में भय का माहौल है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस पहल नज़र नहीं आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भी जमीनी कार्रवाई का अभाव चिंता बढ़ा रहा है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कई इलाके ऐसे हैं जहां कुत्तों के डर से लोग रास्ता बदलकर निकलने को मजबूर हैं। अचानक हमला कर देना, पीछे से काट लेना और रात के समय झुंड में दौड़ाना अब आम बात हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों और सुबह-शाम टहलने वालों को हो रही है। कई मामलों में लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।

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जिला अस्पताल और ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। शासन-प्रशासन हर माह लाखों रुपये खर्च कर रहा है, फिर भी आवारा कुत्तों की संख्या में कोई कमी नहीं दिखती। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा रही है, बल्कि आमजन की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के लिए शेड, नसबंदी और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में सख्त आदेश दिए हैं। आदेशों से आमजन को उम्मीद जगी थी कि नगर पालिका और नगर पंचायतें तेजी से कदम उठाएंगी, लेकिन अब तक केवल कागजी प्रक्रियाएं ही आगे बढ़ती दिख रही हैं। नगर पालिका क्षेत्र में जमीन चिन्हित करने की बात कही जा रही है, पर शेड निर्माण की समय-सीमा स्पष्ट नहीं है।

इस संबंध में नगर पालिका मऊ के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि नगर पालिका में जमीन चिन्हित कर ली गई है और अन्य नगर पंचायतों को भी जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी की जाएंगी। हालांकि, आम नागरिकों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखेगी, तब तक समस्या जस की तस बनी रहेगी।

शहरवासियों की मांग है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी, शेड निर्माण और निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि मऊ में बढ़ते इस खतरे पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

Editor CP pandey

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