गौरैया के खाने पीने से लेकर उसे घर तक उपलब्ध करा रहे मिथिलेश
मिहींपुरवा (राष्ट्र की परम्परा) घर के आंगन तथा फूस और खपरैल के मकान में चूं चूं का राग सुना कर मन को आनंदित करने वाली गौरैया धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हो गई है। गौरैया विलुप्त ना हो इसके लिए 20 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय गौरैया दिवस मनाया जाता है । गौरैया किसानों की हितैषी चिड़िया कही जाती है जो मनुष्य के बीच रहना पसंद करती है । फूस और खपरैल के मकान इसके पसंदीदा आश्रय होते हैं ।लेकिन विकास की चकाचौंध में गौरैया के आशियाने खत्म हो रहे हैं और गौरैया के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। गौरैया विलुप्त होने की कगार पर है । वही प्रकृति से प्रेम करने वाले लोग गौरैया को बचाने में भी जुटे हुए हैं। तहसील मिहींपुरवा के ग्राम पंचायत गुलरा के भज्जापुरवा निवासी मिथिलेश कुमार जायसवाल प्रकृति प्रेमी है। उन्हें बचपन से ही चिड़ियों से प्रेम है । मिथिलेश 2005 से गौरैया संरक्षण पर कार्य कर रहे हैं। लोगों को जागरूकता पंपलेट तथा गौरैया बाक्स बांटकर गौरैया बचाने के लिए जागरूक कर रहे थे । पिछले दिनों कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच तथा नानपारा में आयोजित किसान मेले में गौरैया प्रदर्शनी लगाई थी जो आकर्षण का केन्द्र रही । प्रदर्शनी को कैसरगंज के सासंद बृजभूषण शरण सिंह तथा बहराइच सासंद अक्षयवर लाल गोंड ने सराहा और पीठ थपथपाई। मिथिलेश जायसवाल ने बताया कि मुझे गौरैया बचपन से पसंद थी मैं उनके लिए दाना पानी रखता था और कागज दफ्ती के घोंसले लगा देता था जिसमें धीरे-धीरे करके गौरैया रहने लगी और उनका प्रजनन शुरू हुआ । मिथिलेश ने बताया कि इस कार्य के किसी से कोई सहयोग राशि चंदा नहीं लिया जाता है। घर पर एक छोटी सी किराने की का संचालन करते हुए यह कार्य करता रहता हूँ । इस कार्य से मन को काफी सुकून मिलता है। मैंने घर पर दो दर्जन गौरैया बॉक्स लगा रखा है जिसमें गौरैया रह रही है । सुबह से शाम तक उनके खाने-पीने का पूरा इंतजाम करता हूं ।मिथिलेश के गौरैया संरक्षण कार्य को देखते हुए अनेक पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। 2018 में चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन लखनऊ की ओर से राजधानी में आयोजित सम्मान समारोह में पूर्व डीजपी सुलखान सिंह तथा लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया के हांथों इन्हें प्रकृति रत्न सम्मान से भी सम्मानित किया गया था , 2023 में कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब की ओर से इन्हें बर्डमैन आफ बहराइच की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है । जिला अधिकारी बहराइच ,जिला कृषि अधिकारी ,कृषि विज्ञान केन्द्र सहित अनेक संस्थाओं द्वारा भी इन्हें सम्मानित किया जा चुका है । ज्ञात हो कि मिथिलेश जायसवाल दोनों पैरों से दिव्यांग है ।दिव्यांगता के बावजूद मिथिलेश प्रकृति पर्यावरण तथा गौरैया संरक्षण का कार्य बखूबी कर रहे हैं।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी और 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या…
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज विधानसभा क्षेत्र के विकास, बदहाल मोहन सेतु, सोनूघाट से बरहज…
बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाना प्रभारी सूर्यप्रकाश सिंह…
रिश्तों में रूठापन हो,बातों में तल्ख़ी आती है,दिल के किसी कोने मेंमिलने की आस जगाती…
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और सैलाब के बाद तबाही का मंजर…
रसोई में महंगाई का तड़का: प्याज 70 रुपये पार, चीनी की तेजी ने बढ़ाई चिंता;…