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सोशल मीडिया: समाज के लिए वरदान के साथ अभिशाप भी है सावधानीपूर्वक इसका प्रयोग करे

     लेखिका - सुनीता कुमारी

​सोशल मीडिया (Social Media) एक ऐसा ऑनलाइन माध्यम (Online Platform) है, जहाँ लोग आपस में जुड़ते हैं, जानकारी साझा करते हैं, विचार व्यक्त करते हैं, मनोरंजन करते हैं और समाचार या घटनाओं से जुड़ी सामग्री देख या बना सकते हैं।सोशल मीडिया वह डिजिटल मंच है जहाँ कोई भी व्यक्ति अपने विचार, फोटो, वीडियो या जानकारी साझा कर सकता है और दूसरों से बातचीत कर सकता है।
​सोशल मीडिया आज के दौर में हमारे जीवन का एक अविभाज्य अंग बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब X) और यूट्यूब जैसे मंचों ने संचार की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ दिया है। यह एक ऐसा शक्तिशाली उपकरण है जिसने समाज को एक नए तरीके से जोड़ा है, लेकिन इसके साथ ही इसने नई चुनौतियाँ भी पैदा की हैं। प्रश्न यह है कि सोशल मीडिया वास्तव में हमारे समाज के लिए वरदान है या अभिशाप?एक ओर जहां इसके अनेको फायदे है वही ढेरो नुकसान भी है।सोशल मीडिया के कारण समाज तेजी से बदल रहा है।
​सोशल मीडिया एक वरदान के रूप में

सूचना और ज्ञान का प्रसार:
सोशल मीडिया ने जानकारी को लोकतंत्रात्मक बना दिया है। पल-पल की खबरें, शिक्षाप्रद सामग्री और विभिन्न विषयों पर ज्ञान कुछ ही क्लिक दूर है। यह दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी पहुँच गया है, जहाँ पारंपरिक मीडिया की पहुँच सीमित है।

सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता:
इसने लोगों को सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के लिए एकजुट होने का एक मंच दिया है। ‘मी टू’ और अन्य जागरूकता अभियानों ने इसी मंच के माध्यम से अपनी आवाज़ बुलंद की है। इसने सरकारों को अधिक जवाबदेह बनाया है।

कनेक्टिविटी और भावनात्मक समर्थन:
यह दूर रहने वाले दोस्तों और परिवार से जुड़े रहने का एक बेहतरीन माध्यम है। यह लोगों को समान रुचियों वाले समुदायों से जोड़कर भावनात्मक समर्थन और अपनत्व की भावना प्रदान करता है।
​सोशल मीडिया एक अभिशाप के रूप में

फेक न्यूज़ और गलत सूचना:
यह सोशल मीडिया का सबसे खतरनाक पहलू है। गलत और भ्रामक जानकारी (Fake News) आग की तरह फैलती है, जिससे सामाजिक वैमनस्य, दंगे और अफवाहों को बढ़ावा मिलता है। यह लोकतंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव:
सोशल मीडिया पर लगातार दूसरों की “परिपूर्ण” जीवनशैली देखकर लोग हीन भावना, तनाव और अवसाद का शिकार हो जाते हैं। ‘लाइक’ और ‘कमेंट’ पर निर्भरता एक प्रकार की लत पैदा करती है, जिससे वास्तविक जीवन के रिश्ते प्रभावित होते हैं।

एकांतता और साइबर बुलिंग:
सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से लोग वास्तविक दुनिया से कटकर एकांत महसूस करने लगते हैं। साथ ही, साइबर बुलिंग (ऑनलाइन धमकाना या अपमानित करना) एक गंभीर समस्या है, जो विशेषकर किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है।
​निष्कर्ष
​सोशल मीडिया दो-धारी तलवार की तरह है। इसकी शक्ति निष्पक्ष है; यह न तो पूरी तरह से अच्छा है और न ही बुरा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं।
​यह आवश्यक है कि हम एक समाज के रूप में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दें। हमें इसके सकारात्मक पहलुओं को अपनाना चाहिए (जैसे ज्ञान प्राप्त करना, सामाजिक मुद्दों पर आवाज़ उठाना) और इसके नकारात्मक प्रभावों से स्वयं को बचाना चाहिए (जैसे फेक न्यूज़ शेयर करना, अनावश्यक तुलना करना)। स्व-नियमन (Self-Regulation) ही वह कुंजी है जो सोशल मीडिया को समाज के लिए एक वरदान बनाए रख सकती है।

सुनीता कुमारी -बिहार

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rkpnews@desk

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