नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)डिजिटल युग में सोशल मीडिया बच्चों और युवाओं के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स ने संवाद, मनोरंजन और रचनात्मकता को बढ़ावा तो दिया है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
कई शोधों में पाया गया है कि कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया की लत से तनाव, आत्मग्लानि, अनिद्रा और अवसाद जैसे गंभीर मानसिक रोगों का शिकार हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह लत बच्चों के आत्मविश्वास और पढ़ाई-लिखाई पर भी गहरा असर डाल रही है।
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📌 बच्चों में सोशल मीडिया की लत के खतरे
- तनाव और अवसाद – लगातार स्क्रॉलिंग और लाइक्स की होड़ बच्चों में मानसिक दबाव बढ़ाती है।
- आत्मग्लानि और तुलना – दूसरों की जिंदगी देखकर बच्चे खुद को कमजोर मानने लगते हैं।
- नींद की कमी – देर रात तक ऑनलाइन रहने से नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है।
- साइबर बुलिंग का खतरा – ऑनलाइन तानों और ट्रोलिंग से बच्चे मानसिक रूप से टूट सकते हैं।
- शैक्षणिक गिरावट – पढ़ाई की बजाय बच्चे समय का बड़ा हिस्सा फोन और इंटरनेट पर खर्च कर देते हैं।
📌 बच्चों को सोशल मीडिया की लत से कैसे छुड़ाएं?
✔️ समय सीमा तय करें – बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल का समय रोज़ाना 1-2 घंटे तक सीमित करें।
✔️ खुले संवाद करें – उनसे सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान पर बातचीत करें।
✔️ ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा दें – खेलकूद, पेंटिंग, किताबें और परिवार संग समय बिताने की आदत डालें।
✔️ डिजिटल डिटॉक्स – हफ्ते में एक दिन “नो सोशल मीडिया डे” रखें।
✔️ माता-पिता की निगरानी – बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखें और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट यूज़ करना सिखाएं।
🧠 विशेषज्ञों की राय
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में सोशल मीडिया की लत धीरे-धीरे नशे की तरह असर करती है। इसलिए समय रहते जागरूकता और नियंत्रण बेहद ज़रूरी है।
