स्वच्छता अभियान की शुरुआत के साथ स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन में नवाचार और स्वदेशी अर्थव्यवस्था पर हुआ मंथन
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में गुरुवार को सामाजिक सरोकार से लेकर तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था तक विभिन्न विषयों पर गतिविधियां हुईं। टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित करने के साथ ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान शुरू हुआ। विद्यार्थियों ने इंटर्नल स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन में तकनीकी मॉडल प्रस्तुत किए, जबकि एमीनेंट लेक्चर सीरीज में स्वदेशी अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत पर विचार रखे गए।
टीबी मरीजों की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से तैयार पोषण पोटलियां वितरित की गईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। उन्होंने कहा कि टीबी के उपचार के साथ मरीजों के पोषण और मानसिक संबल पर भी ध्यान जरूरी है। विश्वविद्यालय की ओर से यह सहयोग अभियान अगले छह माह तक जारी रहेगा।
‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान का शुभारंभ करते हुए कुलपति ने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। विश्वविद्यालय में यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत परिसर, कार्यस्थल और आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने के साथ विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय परिवार को जागरूक किया जाएगा।
‘इंटर्नल स्मार्ट इंडिया हैकेथॉन-2026’ में विभिन्न विभागों की छात्र टीमों ने सामाजिक और व्यावहारिक समस्याओं से जुड़े तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। द इनोवेटर्स, कोडिंग एवेंजर्स, इनसाइडर्स, टीम होराइजन, डिवाइन कोडर्स, कोड नोवा, एपेक्स एलायंस, कंपाइल क्रैकर्स, सर्किटएक्स, कॉस्मोकॉमन्स, कोड जॉम्बीज, विजनफोर्ज, कॉग्निक्स, बाइटफोर्स, क्वांटम फोर्ज, व्योम विजन, हैकस्ट्रीट, विकसित्वा और टीम स्टेल्यून समेत अन्य टीमों ने प्रतिभाग किया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विद्यार्थियों से तकनीक का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करने को कहा। विजेता टीमों को आगे जनपद, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।
एमीनेंट लेक्चर सीरीज में ‘स्वदेशी अर्थशास्त्र और आत्मनिर्भर भारत : आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण’ विषय पर व्याख्यान हुआ। मुख्य अतिथि अन्नदा शंकर पाणिग्रही ने स्वदेशी वस्तुओं और भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने युवाओं से स्थानीय संसाधनों को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का आह्वान किया।
कुलपति ने आत्मनिर्भरता के लिए अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, उद्यमिता और बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक समावेशन और पर्यावरण संरक्षण को भी विकास का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रमों में कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, प्रो. धीरेन्द्र पाण्डेय, प्रो. सुनील बाबू गोसीपटाला, डॉ. रवि शंकर वर्मा, डॉ. मनोज कुमार डडवाल, डॉ. पवन कुमार चौरसिया, डॉ. नरेंद्र सिंह समेत शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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